चीन से आने वाले निवेश नियमों में बदलाव की तैयारी… अमेरिका की सख्ती के बाद ड्रैगन पर कड़ी नजर…

भारत और चीन के बीच रिश्ते बेहतर हो रहे हैं, जिसके चलते भारत सरकार चीन से आने वाले विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) पर लगे कुछ प्रतिबंधों को हटाने पर विचार कर रही है।

ET के रिपोर्ट के अनुसार, एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि जरूरत पड़ने पर ‘प्रेस नोट 3’ की समीक्षा की जा सकती है, जिससे चीन से निवेश के नियमों में बदलाव हो सकता है।

दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार

दरअसल, ट्रंप के ‘टैरिफ युद्ध’ के कारण पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार देखा गया है। मंत्रियों और अधिकारियों के दौरे हुए हैं।

नई दिल्ली और बीजिंग ने सीधी उड़ानें शुरू करने, पर्यटकों को अनुमति देने और सीमा विवादों को सुलझाने के लिए बातचीत तेज करने पर सहमति जताई है।

माना तो ये भी जा रहा है कि अमेरिका द्वारा 27 अगस्त 2025 से भारत पर 50% टैरिफ लगाने के फैसले ने भी इस दिशा में योगदान दिया, और दोनों देश एक दूसरे के नजदीक आ गए।

7 साल बाद चीन जाएंगे पीएम मोदी

पिछले हफ्ते चीनी विदेश मंत्री वांग यी के दौरे के बाद चीन ने रेयर अर्थ मैग्नेट और उर्वरकों की आपूर्ति के लिए सहमति दी है। विदेश मंत्री एस जयशंकर छह साल बाद इस महीने बीजिंग गए और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिले।

दोनों देश रिश्तों को बेहतर बनाने की दिशा में प्रयासरत हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर 2025 तक शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के लिए चीन जाएंगे। सात साल में यह उनका पहला दौरा होगा, जहां वे राष्ट्रपति शी से मुलाकात करेंगे।

प्रेस नोट 3 क्या है?

प्रेस नोट 3 के अनुसार, भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों से FDI के लिए सरकारी मंजूरी अनिवार्य है। अप्रैल 2020 में लागू इस नियम का मकसद भारतीय कंपनियों को अवसरवादी अधिग्रहण से बचाना था। यह कदम खासकर सीमा पर तनाव के बाद चीन को ध्यान में रखकर उठाया गया था।

नीति आयोग का सुझाव

नीति आयोग ने पिछले महीने सुझाव दिया कि चीन से 24% तक के FDI के लिए अनिवार्य सरकारी मंजूरी की शर्त हटाई जाए। इससे चीनी कंपनियों को भारतीय कंपनियों में 24% तक निवेश के लिए पूर्व-मंजूरी की जरूरत नहीं होगी, जिससे भारत में चीनी निवेश बढ़ सकता है।

मंत्री पीयूष गोयल ने क्या कहा?

पिछले हफ्ते ‘ET वर्ल्ड लीडर्स फोरम 2025’ में वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह नियम उस समय जरूरी था और भारत के रणनीतिक हितों से जुड़ा था।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह FDI पर रोक नहीं है, बल्कि पूर्व-मंजूरी की शर्त है, और कई कंपनियों को मंजूरी दी गई है। प्रेस नोट 3 के भविष्य पर सवाल उठने पर गोयल ने कहा कि वह मौजूदा स्थिति पर ही टिप्पणी कर सकते हैं और समय के साथ फैसले बदल सकते हैं।

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