पाकिस्तान के झेलम में मुस्लिम धर्मगुरु इंजीनियर मुहम्मद अली मिर्जा को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस ने यह गिरफ्तारी सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के कानून के तहत की है। गिरफ्तारी के बाद उनकी अकादमी को भी सील कर दिया गया है।
इस गिरफ्तारी के पीछे मुख्य वजह, अली मिर्जा के विवादास्पद बयान और धार्मिक मतभेद पैदा करने वाले भाषण हैं। मिर्जा अक्सर अपने यूट्यूब चैनल और अकादमियों में धार्मिक विषयों पर व्याख्यान देते हैं।
मिर्जा की काफी बड़ी फैन फॉलोइंग है, लेकिन कई धार्मिक गुट उनके विचारों को आपत्तिजनक मानते हैं।
किस बात पर भड़के लोग
मिर्जा पर विभिन्न धार्मिक संप्रदायों के प्रमुख विद्वानों के खिलाफ भड़काऊ और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप है।
धार्मिक संगठनों ने उन पर धार्मिक सद्भाव बिगाड़ने का आरोप लगाते हुए शिकायतें दर्ज कराई थीं। उनके कुछ व्याख्यान, जिनमें उन्होंने पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं और प्रथाओं पर सवाल उठाए, विवाद का कारण बने।
उदाहरण के लिए, उन्होंने दाढ़ी को सुन्नत और दीन का हिस्सा नहीं बताया और संगीत को जायज ठहराया। यह कई पारंपरिक उलेमाओं के विचारों से बिल्कुल विपरीत है।
धर्मगुरु की हत्या तक की बात
एक वायरल वीडियो में मिर्जा ने कथित तौर पर एक धर्मगुरु की हत्या की बात कही थी। हालांकि बाद में सफाई पेश करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी बात को संदर्भ से हटाकर पेश किया गया था।
इस घटना के बाद उन पर दंगा भड़काने का आरोप लगा और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।
उन्होंने भारत में नूपुर शर्मा द्वारा पैगंबर पर दिए गए बयान का समर्थन किया था और इसके लिए मुस्लिम पैनलिस्ट को जिम्मेदार ठहराया था। उनके इस रुख की भी काफी आलोचना हुई थी।