रामभद्राचार्य जैसी तेज़ याद्दाश्त कैसे पाएं? खुद बताया राज, जानें क्या है फॉर्मूला…

जगद्गुरु रामभद्राचार्य इन दिनों खबरों में हैं। एक पॉडकास्ट में चर्चाएं उनकी टिप्पणियों को लेकर हो रही हैं।

इसके साथ ही रामभद्राचार्य की याद्दाश्त भी एक बार फिर से सुर्खियों में आ गई है। असल में रामभद्राचार्य मात्र दो माह की उम्र में ही अपनी आंखों की रोशनी खो बैठे थे।

लेकिन बाद में उन्होंने सुन-सुनकर रामचरितमानस समेत तमाम शास्त्रों को याद कर लिया। पॉडकास्ट में रामभद्राचार्य से पूछा गया था कि आखिर उन्हें सबकुछ कैसे याद रहता है।

रामभद्राचार्य ने इस सवाल का जवाब भी दिया है, साथ ही अपनी याद्दाश्त तेज करने का फॉर्मूला भी बताया है।

बता दें रामभद्राचार्य ने प्रेमानंद महाराज पर भी कुछ टिप्पणी की थी, जिसका सोशल मीडिया पर काफी विरोध हो रहा था। हालांकि बाद में उन्होंने यह कहते हुए सफाई पेश की है कि उन्होंने प्रेमानंद महाराज पर कोई अनुचित टिप्पणी नहीं की है।

याद्दाश्त बढ़ाने का यह मंत्र
पॉडकास्ट में रामभद्राचार्य से पूछा गया था कि आपको इतना कुछ कंठस्ठ है। आपकी याद्दाश्त पर काफी बातें होती हैं। अगर कोई नया बालक आपकी तरह अपनी याद्दाश्त बढ़ाना चाहे तो उसे क्या कोशिश करनी चाहिए? उसे किस तरह की तैयारी करनी चाहिए? इसके जवाब में रामभद्राचार्य कहते हैं कि तीन बातें करनी होंगी।

सबसे पहले तो आस्तिक बनना होगा। दूसरी चीज, ब्रह्मचर्य का पालन करना होगा। इसके अलावा, शास्त्र के साथ जुड़ना होगा। उन्होंने कहा कि इन चीजों का पालन करके अपनी याद्दाश्त तेज की जा सकती है।

कई शास्त्र हैं याद
गौरतलब है कि रामभद्राचार्य की आंखों की रोशनी मात्र दो माह की आयु में चली गई थी। इसके बावजूद उन्हें तमाम शास्त्र कंठस्थ हैं।

उन्हें ‘अष्टावधानी’ कहा जाता है, जिसका अर्थ है एक ही समय में आठ अलग-अलग चीजों पर ध्यान केंद्रित करने और उन्हें याद रखने की क्षमता। कहा जाता है कि रामभद्राचार्य ने मात्र पांच सल की आयु में संपूर्ण श्रीमद्भगवद्गीता को कंठस्थ कर लिया था।

यह भी बताते हैं कि मात्र सात साल की उम्र तक उन्हें संपूर्ण रामचरितमानस और वेद पूरी तरह याद हो गए थे। वे कई भाषाओं के हजारों श्लोक और छंद बिना किसी गलती के सुना सकते हैं। राम मंदिर केस में उनकी गवाही को काफी अहम माना गया था।

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