बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद से ही मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार पाकिस्तान से करीबी बढ़ाने में जुटी है।
वहीं भारत और बांग्लादेश के संबंधों में खटास आ गई है। 1971 से ही पाकिस्तान से माफी मांगने की शर्त रखने वाला बांग्लादेश अब आतंकवादियों को शह देने वाले देश की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ा रहा है।
हास्यास्पद यह है कि अपने लोगों का पेट भरने के लिए दर-दर भीख मांगने वाले पाकिस्तान ने बांग्लादेश के छात्रों को शिक्षा मुहैया करवाने और छात्रवृत्ति देने का वादा किया है।
दोनों देशों ने शिक्षा और बिजनेस के क्षेत्र में संबधों को मजबूत करने के लिए पाकिस्तान-बांग्लादेश नॉलेज कॉरिडोर की शुरुआत की है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर यह जानकारी दी है।
पोस्ट के मुताबिक अगले पांच साल में पाकिस्तान में हायर एजुकेशन के लिए बांग्लादेशी छात्रों को स्कॉलरशिप दी जाएगी। इसके अलावा बांग्लादेश के प्रशासनिक अधिकारियों के लिए ट्रेनिंग का भी इंतजाम किया जाएगा।
आपको बता दें कि 2012 के बाद पहली बार कोई पाकिस्तानी विदेश मंत्री बांग्लादेश की यात्रा पर पहुंचा है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार और मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के बीच 6 समझौतों पर साइन किए गए हैं।
इनमें सांस्कृतिक आदान-प्रदान, फ्री वीजा एंट्री और दोनों देशों की विदेश सेवा के लिए ट्रेनिंग का समझौता किया गया है।
लटक गई माफी वाली बात
इशाक डार की बांग्लादेश यात्रा से पहले एक बार फिर 1971 के युद्ध को लेकर माफी का मुद्दा उठा था। हालांकि यह मुद्दा धरा का धरा रह गया।
1971 में पाकिस्तानी सेना के अत्याचार से हजारों बांग्लादेशी मारे गए थे। ढाका के विदेश मामलों के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन ने कहा कि यह मुद्दा अनसुलझा रह गया है लेकिन दोनों देश संबंधों को मजबूत करने पर सहमत हुए हैं।
तौहीद हुसैन ने कहा, हमारे संबंधों के बीच जो भी मुद्दे आड़े आ रहे हैं, उन्हें सुलझाना होगा। जानकारों का कहना है कि बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच जो भी चल रहा है, भारत की उसपर कड़ी नजर है।
दरअसल बांग्लादेश में तख्तापलट हुआ तो पूर्व पीएम शेख हसीना ने भारत में शरण ली। बांग्लादेश में कट्टरपंथियों ने सत्ता पर कब्जा कर लिया। इसके बाद से ही भारत के साथ संबंधों में खटास आ गई।