प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को 30 दिन की जेल के बाद पद से हटाने के लिए लाए गए विधेयक को संसदीय संयुक्त कमेटी के पास भेज दिया गया है।
लेकिन अब इस कमेटी को गठित करने के लिए विपक्षी सांसदों में मतभेद सामने आ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी टीएमसी के इस समिति में अपने सदस्यों को भेजने की संभावना नहीं है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने इंडिया ब्लॉक की मीटिंग के दौरान इस बात का सुझाव दिया कि पूरे विपक्ष को ही इस समिति का बहिष्कार करना चाहिए।
लेकिन विपक्ष की बाकी पार्टियों ने समिति में शामिल होने की बात कही, ताकि मोदी सरकार इसे मंजूरी न दिलवा पाए। उनके मुताबिक समिति ही एक ऐसी जगह है, जहां पर विपक्ष अपनी बात रख सकता है और कुछ नए सुझाव भी दे सकता और दूरी भी बना सकता है।
इस पर टीएमसी के एक नेता ने कहा कि अगर विपक्ष समिति में जाता है, तो यहां भी सरकार वक्फ बिल की तरह कोई न कोई रास्ता निकाल ही लेगी।
इसके बाद टीएमसी की तरफ से इस बात के संकेत दिए गए कि वह अपने 31 सांसदों के दल में से किसी को भी समिति में नहीं भेजेगी।
हालांकि टीएमसी की तरफ से अभी तक कोई फाइनल निर्णय नहीं लिया गया है। ऐसे में कांग्रेस, जिसे 4 से 5 सीटें मिलेगी और अन्य इंडिया ब्लॉक पार्टियां टीएमसी के फैसले का इंतजार कर रही हैं।
केंद्र सरकार द्वारा लाए गए इस बिल को विपक्षी सरकारों को गिराने का राजनीतिक हथियार बताने वाली तृणमूल कांग्रेस ने संयुक्त समिति को समय की बर्बादी बताया है। उनके मुताबिक सरकार के पास संसद में इस विधेयक को पास कराने का बहुमत नहीं है।
क्योंकि संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता है, जो कि वर्तमान में एनडीए सरकार के पास नहीं है। इसके बाद भी किसी तरह से यह बिल पास हो भी जाता है, तब भी यह न्यायिक प्रक्रिया का सामना नहीं कर पाएगा।