राष्ट्रपति पद के लिए ट्रंप उपयुक्त नहीं, भारत से तनाव को लेकर बोले पूर्व NSA बोल्टन; भारतीयों को दी खास सलाह…

दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र भारत और अमेरिका, पिछले दो दशकों के बेहतर रिश्तों के बाद एक बार फिर से आमने-सामने हैं।

दोनों की साझेदारी सामान्य है, लेकिन वैश्विक मुद्दों और व्यापार डील को लेकर उलझे हुए हैं। इसी को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 50 फीसदी टैरिफ का ऐलान कर दिया है।

अब ट्रंप के इस टैरिफ को लेकर उनके पूर्व NSA जॉन बोल्टन ने कहा है कि ट्रंप की नीतियां किसी भी पार्टी की सोच के हिसाब से नहीं है।

इसलिए इन नीतियों का असर ट्रंप के साथ ही चला जाएगा। उन्होंने कहा कि ट्रंप ऐसे अजीबोगरीब फैसले लेते रहते हैं। इसलिए उनका (बोल्टन) का मानना है कि ट्रंप राष्ट्रपति पद के लिए ठीक नहीं है।

इंटरव्यू में बोल्टन ने कहा कि भारत को लेकर ट्रंप प्रशासन की नीति बहुत ही असमंजस वाली है। वह नई दिल्ली पर रूसी तेल खरीदने के लिए प्रतिबंध लगाते हैं लेकिन बीजिंग को खुला छोड़ देते हैं।

ट्रंप को पद के लिए अनफिट बताते हुए बोल्टन ने कहा कि हमें यह स्वीकार करना होगा कि इस समय पर वाशिंगटन और नई दिल्ली के संबंध सबसे निचले स्तर पर हैं लेकिन ट्रंप की नीतियों का असर ठीक उस समय खत्म हो जाएगा, जब उनका कार्यकाल समाप्त होगा।

भारत पर प्रतिबंध, चीन, रूस को छोड़ा: बोल्टन

नई दिल्ली के साथ बिगड़ते रिश्तों पर बात करते हुए बोल्टन ने कहा, “सबसे बड़ी चिंता की बात तब सामने आई, जब भारतीय और अमेरिका के प्रतिनिधि एक व्यापार डील करने के लिए बात कर रहे थे, लेकिन ट्रंप अचानक से उठे और ऐलान कर दिया कि 25 फीसदी टैरिफ होगा।

इसके अलावा रूसी तेल को लेकर भी जो टैरिफ लगाया गया, वह भी कुछ ऐसा ही था। रूस पर कोई नया प्रतिबंध नहीं लगा, चीन पर नहीं लगा लेकिन भारत पर लगा दिया गया। यह ट्रंप की असमंजस वाली नीति का ही परिणाम है। हालांकि हमें यह मानना होगा कि ट्रंप की नीतियों की वजह से रिश्ते आज बहुत खराब स्थिति में हैं।”

भारतीयों को बोल्टन की सलाह

अमेरिकी प्रशासन द्वारा लाई गई नीतियों के फलस्वरूप भारत समेत कई देशों में अमेरिका के प्रति एक अविश्वास की भावना पैदा हुई है। कई रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय लोगों में पिछले दो दशक में अमेरिका को लेकर जो दोस्त वाली भावना आनी शुरू हुई थी, वह ट्रंप ने एक झटके में खत्म कर दी।

इसका जवाब देते हुए बोल्टन ने वाशिंगटन को बचाने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “दुर्भाग्य से, टैरिफ के मामले में ट्रंप ने जो किया है वह भारत समेत कई अन्य देशों के साथ हमारे दशकों की मेहनत के बाद बनाए गए संबंधों को खराब कर रहा है। इसे सुधारने में अब फिर समय लगेगा। लेकिन इस मुद्दे की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ट्रंप एक अलग ही सोच रखते हैं। उनकी इस सोच का प्रतिनिधित्व न तो डेमोक्रोटिक पार्टी करती है और न ही रिपब्लिकन, कम से कम मैं तो ऐसे किसी को नहीं जानता, जो इस तरह का व्यवहार करे।”

रिश्तों को संभालना होगा: बोल्टन

बोल्टन ने कहा, “इस मुद्दे पर ट्रंप की कोई फिलॉसिफी नहीं है। इसलिए उनके उत्तराधिकारियों के लिए इसमें कुछ भी विरासत नहीं है। ट्रंप जो कर रहे हैं, वह ज्यादातर अमेरिका की सोच नहीं है।

ऐसे में ट्रंप के कार्यकाल के खत्म होने के साथ ही उनकी इन नीतियों का असर भी खत्म होना शुरू हो जाएगा।” भविष्य की नीतियों को लेकर बोल्टन ने कहा कि हमें दोनों देशों के बीच में लोगों की बातचीत को बढ़ाना चाहिए।

इससे दोनों देशों के बीच में बेहतर संबंध होंगे। टैरिफ मुद्दे के पहले ट्रंप और मोदी के बीच में बेहतर संबंध थे। पीएम मोदी सही समय पर सही बात कर सकते हैं। शायद सितंबर में होने वाली यूएन जनरल असेंबली के दौरान वह ट्रंप से सीधी बात करके इस मुद्दे पर बातें साफ कर सकते हैं।

बोल्टन या कोई कुछ भी कहे लेकिन एक बात साफ है कि ट्रंप राष्ट्रपति पद पर हैं। वह एक बार नहीं दो बार चुनाव जीतकर वहां पहुंचे हैं। ऐसे में अगर वह कोई फैसला लेते हैं, तो वह उनकी एक बड़ी फॉलोइंग के साथ होता है। ट्रंप की इन नीतियों ने नई दिल्ली के साथ वाशिंगटन के संबंधों में खटास तो पैदा की ही है, पिछले 7 सालों से ठंडे बस्ते में डले भारत और चीन के संबंधों में भी एक नई गर्मजोशी पैदा कर दी है।

दो हफ्तों में भारतीय एनएसए अजित डोभाल, विदेश मंत्री जयशंकर की रूस यात्रा और चीनी विदेश मंत्री की भारत यात्रा, इसके अलावा कुछ दिनों के बाद पीएम मोदी की चीन यात्रा और पुतिन की भारत यात्रा की संभावना… नई दिल्ली की तरफ से वाशिंगटन को एक सीधा संदेश है कि भारत अपनी संप्रभुता पर बात नहीं करेगा और न ही किसी दूसरे देश के मुताबिक व्यापारिक फैसले लेगा।

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