यूक्रेन पर पुतिन का रुख नरम, युद्धविराम के लिए रखीं 3 शर्तें; क्या डोनबास छोड़ेंगे जेलेंस्की?…

रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर हाल ही में अलास्का में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहली शिखर वार्ता में महत्वपूर्ण संकेत मिले हैं।

सूत्रों के मुताबिक, पुतिन ने शांति समझौते के लिए तीन प्रमुख शर्तें रखी हैं।

पुतिन चाहते हैं कि यूक्रेन पूरा डोनबास क्षेत्र छोड़ दे, नाटो (NATO) में शामिल होने की महत्वाकांक्षा त्याग दे और तटस्थ रहे और अपनी जमीन पर पश्चिमी सैनिकों की तैनाती न होने दे।

सूत्रों के अनुसार, पुतिन ने जून 2024 की अपनी पुरानी मांगों को कुछ हद तक नरम किया है।

पहले वह चाहते थे कि यूक्रेन चारों प्रांत (डोनबास के डोनेट्स्क व लुहांस्क, साथ ही खेरसॉन और जापोरिजझिया) रूस को सौंप दे। लेकिन अब उन्होंने अपनी मांग केवल डोनबास तक सीमित कर दी है।

इसके बदले रूस वर्तमान जापोरिजझिया और खेरसॉन के मोर्चों पर लड़ाई रोकने को तैयार है। पुतिन यहां तक कि खारकीव, सुमी और ड्निप्रोपेत्रोव्स्क के कुछ हिस्सों से पीछे हटने पर भी राजी हो सकते हैं।

पुतिन का जोर इस बात पर है कि यूक्रेन नाटो सदस्यता की राह छोड़े और अमेरिकी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन से कानूनी रूप से गारंटी ले कि वह और आगे पूर्व की ओर विस्तार नहीं करेगा।

साथ ही, वह इस पर भी अड़े हैं कि कोई भी पश्चिमी देश यूक्रेन में शांति सेना के नाम पर सैनिक तैनात न करे।

यूक्रेन का सख्त विरोध

राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने इन प्रस्तावों को अस्वीकार कर दिया है। उन्होंने कहा, “डोनबास को छोड़ना संभव नहीं है। यह हमारे देश के अस्तित्व और हमारी सबसे मजबूत रक्षा पंक्ति का सवाल है।”

यूक्रेन की संविधान में नाटो सदस्यता एक रणनीतिक लक्ष्य है और कीव का मानना है कि यही उसकी सबसे मजबूत सुरक्षा गारंटी है।

ट्रंप का दावा- शांति चाहते हैं पुतिन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह इस युद्ध को “खूनी संघर्ष” बताते हुए खत्म करना चाहते हैं और खुद को एक “पीसमेकर राष्ट्रपति” के तौर पर याद कराया जाना चाहते हैं। ट्रंप ने जेलेंस्की के साथ बैठक में कहा, “मुझे विश्वास है कि व्लादिमीर पुतिन युद्ध खत्म करना चाहते हैं। हम इसे हल करेंगे।”

ट्रंप प्रशासन अब रूस और यूक्रेन के बीच सीधी वार्ता कराने की तैयारी में है, जिसके बाद एक त्रिपक्षीय (रूस-यूक्रेन-अमेरिका) शिखर सम्मेलन भी संभव है।

पश्चिमी देशों की शंका

हालांकि ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के नेताओं ने इस बात पर संदेह जताया है कि पुतिन वास्तव में युद्ध समाप्त करना चाहते हैं।

रूसी सूत्रों के अनुसार, यदि समझौता होता है तो इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी के साथ त्रिपक्षीय शांति समझौते के रूप में औपचारिक रूप दिया जा सकता है।

दूसरा विकल्प 2022 के इस्तांबुल समझौतों की ओर लौटना है, जिसमें यूक्रेन की स्थायी तटस्थता और सुरक्षा गारंटी पर चर्चा हुई थी।

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