राष्ट्रपति बने PM के रबर स्टाम्प, सुप्रीम कोर्ट पंगु; इंदिरा गांधी के संशोधन बिल पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद निशिकांत दुबे का हमला…

दागी पीएम-सीएम और मंत्रियों को हटाने वाले प्रस्तावित 130वें संविधान संशोधन बिल पर हो रहे हल्ला-हंगामा के बीच केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद निशिकांत दुबे ने मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस पर हमला बोला है और 1976 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार द्वारा लाए गए 42वें संविधान संशोधन की आलोचना की है।

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि इस संशोधन ने राष्ट्रपति को ‘रबर स्टाम्प’ बनाकर रख दिया, जबकि अदालतों की शक्तियों को कम कर दिया गया और संविधान की प्रस्तावना में ‘समाजवादी’, ‘धर्मनिरपेक्ष’ और ‘अखंडता’ शब्दों को शामिल करके बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान को पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया।

उन्होंने आगे लिखा, “@RahulGandhi जी के कुत्सित और घृणित मानसिकता का विश्लेषण का वक़्त है। देश तोड़ने वाले ताक़तों को सोरोस तथा फ़ोर्ड फाउंडेशन पैसा देकर यह कुटील चाल चल रहा है।”

दुबे ने इससे पहले, 29 जुलाई को संविधान की प्रस्तावना में ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्दों को शामिल करने की अनुमति देने के लिए कांग्रेस पार्टी की आलोचना की थी।

130वां संविधान संशोधन विधेयक में क्या?

एक दिन पहले लोकसभा में पेश 130वां संविधान संशोधन विधेयक में प्रस्तावित किया गया है कि पाँच साल या उससे अधिक की सज़ा वाले आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार किए गए और लगातार 30 दिन हिरासत में रखे गए प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को 31वें दिन पद से हटा दिया जाएगा।

बिल के प्रावधानों के अनुसार, राष्ट्रपति प्रधानमंत्री को हटाएँगे, राज्यपाल मुख्यमंत्रियों को हटाएँगे, और उपराज्यपाल केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों को हटाएँगे। हालांकि, बुधवार को लोकसभा में पेश किए गए इस बिल को सदन ने अध्ययन के लिए संसद की संयुक्त समिति को भेज दिया है।

32वें दिन पद स्वतः ही रिक्त हो जाएगा

बिल में कहा गया है कि अगर 31वें दिन तक कोई इस्तीफा या हटाने की सलाह नहीं दी जाती है, तो 32वें दिन पद स्वतः ही रिक्त हो जाएगा। हिरासत से रिहाई के बाद पुनर्नियुक्ति की अनुमति भी है।

कांग्रेस ने इन विधेयकों पर कड़ी आपत्ति जताई है, पार्टी नेता गुलाम अहमद मीर ने इसे विपक्षी दलों को निशाना बनाने और उन्हें खत्म करने की भाजपा की चाल बताया है।

मीर ने एएनआई से कहा, “अगर किसी मंत्री के खिलाफ कोई मामला दर्ज है और वह गिरफ्तार हो जाता है और 30 दिनों तक हिरासत में रहता है, तो उसका पद जाना तय है।

भाजपा यह कानून इसलिए ला रही है ताकि वह अपने विपक्ष को निशाना बना सके। एक तरह से, ऐसा लग रहा है कि वे विपक्षी दल को खत्म करने के लिए यह विधेयक ला रहे हैं।”

वामपंथी दलों ने भी कहा कि गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्रियों को हटाने का प्रावधान करने वाले नए विधेयक लोकतंत्र और संघीय ढांचे पर सीधा ‘‘हमला’’ हैं और उन्होंने इसका ‘‘पूरी ताकत से’’ विरोध करने का संकल्प लिया।

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