ड्रैगन का दावा: जयशंकर ने ताइवान को चीन का हिस्सा कहा, भारत ने किया खंडन…

चीन ने मंगलवार को दावा किया कि भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात में ताइवान को चीन का हिस्सा बताया।

हालांकि इस दावे को भारत ने झुठला दिया है। वहीं, चीन ने यह भी कहा है कि भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने भी वन-चाइना पॉलिसी का समर्थन दोहराया।

भारतीय आधिकारिक सूत्रों ने स्पष्ट किया कि ताइवान को लेकर भारत की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है और भारत-ताइवान संबंध केवल आर्थिक, तकनीकी और सांस्कृतिक क्षेत्रों तक ही सीमित हैं।

चीनी विदेश मंत्रालय ने जयशंकर और वांग यी की बैठक का ब्योरा जारी करते हुए दावा किया कि भारतीय विदेश मंत्री ने कहा, “ताइवान चीन का हिस्सा है।

स्थिर, सहयोगी और दूरदर्शी भारत-चीन संबंध दोनों देशों के हित में हैं।” इसी तरह, डोभाल के साथ बैठक के बाद चीन ने बयान में कहा कि भारत के एनएसए ने कहा है कि भारत हमेशा से “वन-चाइना पॉलिसी” का पालन करता आया है।

भारत ने दोहराया– स्थिति जस की तस

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “हमारी पोजीशन में कोई बदलाव नहीं है। जैसे बाकी दुनिया ताइवान के साथ आर्थिक, तकनीकी और सांस्कृतिक रिश्ते रखती है, भारत भी वैसा ही करता आया है और करता रहेगा।”

भारत और ताइवान के बीच आधिकारिक राजनयिक रिश्ते नहीं हैं, लेकिन दोनों देशों के प्रतिनिधि कार्यालय मौजूद हैं जो व्यापार और सांस्कृतिक गतिविधियों पर केंद्रित रहते हैं।

सीमा और सहयोग पर बातचीत

चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, वांग यी ने कहा कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछले साल रूस के कजान में हुई मुलाकात के बाद दोनों देशों के रिश्तों में नई शुरुआत हुई है। चीन ने कैलाश मानसरोवर यात्रा बहाल करने और सीमा पर शांति बनाए रखने पर जोर दिया।

भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, चीन ने भारत की तीन प्रमुख मांगों पर आश्वासन दिया है। उर्वरकों, रेयर अर्थ्स और टनल बोरिंग मशीनों की आपूर्ति पर आगे भी बातचीत होने की संभावना है।

इस वर्ष भारत-चीन कूटनीतिक संबंधों की स्थापना के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं। चीनी पक्ष ने कहा कि दोनों देशों को “प्रतिस्पर्धी नहीं, साझेदार” के रूप में एक-दूसरे को देखना चाहिए और साझा विकास की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

गौरतलब है कि भारत ने दिसंबर 2010 में तत्कालीन चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ की यात्रा के दौरान संयुक्त बयान में वन-चाइना पॉलिसी का उल्लेख नहीं किया था। तब से भारत का यही रुख रहा है कि वह औपचारिक तौर पर पॉलिसी को दोहराए बिना ताइवान के साथ अपने आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध जारी रखे।

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