ट्रंप ने समझाया जेलेंस्की को: पुतिन युद्ध रोकने को राजी, लेकिन खोना पड़ेगा बड़ा इलाका…

अलास्का में शुक्रवार को हुई ऐतिहासिक शिखर वार्ता में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए सीधे “शांति समझौते” पर जोर दिया, न कि केवल युद्धविराम पर।

लेकिन बैठक के बाद सामने आए विवरणों से स्पष्ट है कि पुतिन ने यूक्रेन से पूरा डोनेट्स्क क्षेत्र रूस को सौंपने की मांग रखी, जिसे यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने सख्ती से अस्वीकार कर दिया।

सूत्रों के अनुसार, पुतिन ने मौजूदा मोर्चों पर लड़ाई रोकने की पेशकश की, बशर्ते कीव अपनी सेना को डोनेट्स्क से हटा ले। रूस पहले से ही डोनेट्स्क प्रांत के लगभग तीन-चौथाई हिस्से और कुल मिलाकर यूक्रेन के एक-पांचवें हिस्से पर नियंत्रण रखता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेनी नेतृत्व को बताया है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक सशर्त युद्धविराम प्रस्ताव रखा है।

सूत्रों के अनुसार, पुतिन ने सुझाव दिया है कि यदि यूक्रेन पूर्वी डोनेट्स्क और लुहान्स्क क्षेत्रों से अपनी सेना वापस ले ले, तो रूस अन्य क्षेत्रों में युद्ध को वहीं पर रोकने के लिए तैयार है।

पुतिन की शर्तें और यूक्रेन का रुख

रायटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, पुतिन ने शुक्रवार को अलास्का में ट्रंप के साथ अपनी मुलाकात के दौरान यह प्रस्ताव रखा। पुतिन ने कहा कि यदि यूक्रेन डोनबास क्षेत्र से पूरी तरह पीछे हट जाता है, तो रूस दक्षिणी क्षेत्रों खेरसन और जापोरिजिया में युद्ध की अग्रिम पंक्ति को स्थिर कर देगा।

यानी रूसी सेना जहां है वहीं रुक जाएगी। रूसी सेना वर्तमान में डोनेट्स्क क्षेत्र के 70% हिस्से पर कब्जा किए हुए है।

ट्रंप और अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ ने यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की को बताया कि पुतिन ने कहा है कि ऐसा होने से पहले युद्धविराम नहीं हो सकता। विटकॉफ ने कहा कि पुतिन एक समझौते के तहत यूक्रेन के खिलाफ कोई नया आक्रमण न करने का वचन दे सकते हैं।

ट्रंप का बयान: “समझौता करना होगा”

वार्ता के बाद ट्रंप ने कहा, “रूस एक बहुत बड़ी ताकत है, और वे (यूक्रेन) नहीं। समझौता करना होगा।” उन्होंने दोहराया कि युद्ध को खत्म करने के लिए सीधी शांति डील जरूरी है, क्योंकि युद्धविराम अक्सर टिकाऊ नहीं होते। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि उन्होंने और पुतिन ने “जमीन सौंपने” और “यूक्रेन की सुरक्षा गारंटी” पर काफी हद तक सहमति बनाई है। हालांकि, उन्होंने माना कि अंतिम निर्णय यूक्रेन का होगा और “शायद वे ‘ना’ कह दें।”

जेलेंस्की का रुख और सुरक्षा गारंटी की मांग

जेलेंस्की ने स्पष्ट किया कि यूक्रेन बिना संवैधानिक बदलाव के किसी भी क्षेत्र को नहीं छोड़ेगा। उन्होंने डोनेट्स्क के शहर स्लोवियांस्क और क्रामातोर्स्क को रूसी विस्तार के खिलाफ “किले” बताया।

उन्होंने ट्रंप से हुई चर्चा के बाद कहा कि अमेरिका से सुरक्षा गारंटी को लेकर “सकारात्मक संकेत” मिले हैं, लेकिन यह केवल “अगले आक्रमण के बीच का विराम” नहीं होना चाहिए, बल्कि स्थायी शांति होनी चाहिए।

इतालवी प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने बताया कि बैठक में यूक्रेन के लिए नाटो जैसी सामूहिक सुरक्षा धारा की अवधारणा पर भी बात हुई, जिससे किसी नए हमले पर सभी साझेदार, अमेरिका समेत, कार्रवाई करने के लिए बाध्य हों।

मॉस्को की प्रतिक्रिया और पुतिन की ‘कूटनीतिक जीत’

पुतिन ने कहा कि यूक्रेन की सुरक्षा “सुनिश्चित” होनी चाहिए और उम्मीद जताई कि यह समझ “शांति का रास्ता” खोलेगी।

मॉस्को के लिए ट्रंप के साथ यह सीधी बैठक अपने आप में बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जा रही है, क्योंकि पश्चिमी नेताओं ने 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद से पुतिन से दूरी बनाए रखी थी। रूसी मीडिया ने ट्रंप के साथ तीन घंटे चली इस बैठक को “प्रगति का संकेत” बताया, हालांकि कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ।

यूरोप की सतर्क प्रतिक्रिया

ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीयर स्टार्मर ने कहा कि युद्ध खत्म होने के पहले से ज्यादा करीब है, लेकिन रूस पर दबाव बनाए रखना होगा। यूरोपीय नेताओं ने बयान जारी कर कहा कि “यूक्रेन को पुख्ता सुरक्षा गारंटी मिलनी चाहिए” और उसकी सेना या नाटो सदस्यता पर कोई प्रतिबंध नहीं होना चाहिए- ये दोनों ही रूस की मुख्य मांगों के विपरीत हैं।

कुछ यूरोपीय नेताओं ने ट्रंप-पुतिन मुलाकात को “पुतिन के लिए 1-0” जीत बताया और कहा कि यूक्रेन को ठोस लाभ नहीं मिला।

आगे की राह

ट्रंप सोमवार को वाइट हाउस में जेलेंस्की से मुलाकात करेंगे। यदि बात आगे बढ़ी, तो पुतिन के साथ अगली बैठक की योजना बनेगी- संभवतः मॉस्को में।

इस संभावना पर ट्रंप ने मजाक में कहा कि “इस पर थोड़ी आलोचना मिल सकती है, लेकिन यह संभव है।” इसी बीच, रूस और यूक्रेन के बीच मोर्चे पर भीषण लड़ाई और हवाई हमले जारी हैं।

युद्ध के 80 साल में यूरोप के सबसे घातक संघर्ष में अब तक दोनों पक्षों के दस लाख से अधिक लोग मारे गए या घायल हुए हैं, जिनमें हज़ारों यूक्रेनी नागरिक भी शामिल हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *