इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के एक बयान पर सऊदी अरब, सीरिया, लेबनान, इराक जैसे देश भड़क गए हैं।
उन्होंने एक इंटरव्यू में ग्रेटर इजरायल के विजन के साथ अपनी भावनाएं जुड़े होने की बात कही थी।
इसी को लेकर विवाद हो रहा है क्योंकि ग्रेटर इजरायल की परिभाषा में कई बार यहूदी विद्वान सीरिया, जॉर्डन, इराक, सऊदी अरब और मिस्र को भी शामिल करते रहे हैं।
इसके अलावा 1967 में जो 6 दिनों का युद्ध हुआ था, उसमें इजरायल ने गाजा, सिनाई, गोलान हाइट्स, पूर्वी येरूशलम और वेस्ट बैंक को जीच लिया था। इसे भी ग्रेटर इजरायल के रूप में मिलाकर पेश किया जाता रहा है।
यहूदी देश के दक्षिणपंथी विचारक अकसर इच्छा जताते रहे हैं कि गोलान हाइट्स, गाजा, वेस्ट बैंक समेत उन सभी इलाकों का इजरायल में विलय कर लिया जाए और उन पर हुकूमत रहे, जिन्हें 1967 में इजरायल ने जीता था।
इस ग्रेटर इजरायल के नक्शे को ‘मैप ऑफ प्रॉमिस्ड लैंड’ भी कहा जाता रहा है। नेतन्याहू के इस बयान पर सऊदी अरब, जॉर्डन, कतर और अरब लीग की ओर से तत्काल बयान जारी किया गया।
इन बयानों में कहा गया कि नेतन्याहू की यह इच्छा क्षेत्रीय अशांति और अस्थिरता को पैदा करने वाली है। अब तक इस मामले में इजरायल की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
जॉर्डन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि नेतन्याहू का बयान बेहद खतरनाक और उकसाने वाला है। हम ऐसे बयान को सिरे से खारिज करते हैं।
जॉर्डन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सुफयान कुदा ने कहा कि नेतन्याहू का बयान ऐसा है, जो क्षेत्र में हिंसा और अस्थिरता के चक्र को बढ़ावा देगा।
इसके अलावा मिस्र के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इजरायल को इस पर सफाई देनी चाहिए। आखिर वह चाहता क्या है। मिस्र ने कहा कि ऐसे बयान तो क्षेत्र में पहले से चली आ रही अस्थिरता में और इजाफा करेंगे।
इसके अलावा कतर ने कहा कि नेतन्याहू का यह बयान अहंकार से भरा है। वह इजरायल की विस्तारवादी नीति को आखिर कहां तक ले जाना चाहते हैं।