कर्नाटक के सहकारिता मंत्री केएन राजन्ना को सोमवार को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया गया।
करीब एक साल पहले ही बी नागेंद्र भी इस्तीफा दे चुके हैं। कहा जा रहा है कि वाल्मिकी समुदाय से जुड़े दो नेताओं के बाहर किए जाने से मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की सरकार बैकफुट पर आ गई है और भारतीय जनता पार्टी की तरफ से उठाए जा रहे सवालों से बचती नजर आ रही है।
राजन्ना को सिद्धारमैया का करीबी माना जाता है। ऐसे में उन्हें सरकार से बाहर निकाला जाना मुख्यमंत्री के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
खबर है कि राजन्ना को बर्खास्त ऐसे समय पर किया गया है, जब सिद्धारमैया नागेंद्र को कैबिनेट में वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं।
खास बात है कि सिद्धारमैया पिछड़ा वर्ग में शामिल कुरुबा समुदाय से आते हैं। माना जा रहा है कि हाल ही के राजनीतिक घटनाक्रमों के चलते समुदाय को अपने राजनीतिक हितों की रक्षा के लिए उनकी क्षमता पर संदेह हो सकता है।
इकोनॉमिक टाइम्स से बातचीत में अनुसूचित जनजाति के नेता ने कहा कि जिस तरह से राजन्ना को बाहर किया गया, उसकी अपनी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी।
इधर, भाजपा भी संख्याबल से मजबूत समुदाय के गुस्से को लेकर सक्रिय नजर आ रही है। भाजपा ने एक पोस्ट में कहा, ‘कांग्रेस सरकार हमेशा वाल्मिकी समुदाय को धोखा देने के लिए तैयार रहता है।’