केंद्रीय दूरसंचार एवं पूर्वोत्तर विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का कहना है कि इन दिनों अनेक मुद्दों पर विपक्ष की सोच बहुत नकारात्मक हो गई है।
विपक्षी नेता देश की चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी दोहरे मापदंड अपना रहे हैं। जिन राज्यों में विपक्षियों की हार हुई है, वहां वे ‘वोटों की चोरी’ के आरोप लगा रहे हैं।
विपक्ष की कोशिश है कि किसी भी तरह से सत्तापक्ष को नाकाम बताया जाए। केंद्रीय मंत्री से राजनीति, दूरसंचार और पूर्वोत्तर के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर हिन्दुस्तान के राजनीतिक संपादक मदन जैड़ा और विशेष संवाददाता अरुण कुमार ने विस्तृत बातचीत की है, पेश हैं मुख्य अंश-
सवाल- वोटों की चोरी के मुद्दे पर विपक्ष संसद के भीतर और बाहर प्रदर्शन कर रहा है। उसका आरोप है कि मध्य प्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा, महाराष्ट्र में वोटों की चोरी हुई है, इस पर आप क्या सोचते हैं?
जवाब- मैं यही कहूंगा, चुनाव हारे तो चोरी, जीते तो सीनाजोरी। जिस स्वर में वे कह रहे हैं कि जहां वे हारे, वहां वोट चोरी हुई है। उसी स्वर में उनको कहना चाहिए, जहां जीते हैं, वहां भी चोरी हुई है।
यह दोहरे मापदंड अपनाना और दो तरीके से चर्चा करना, इस देश में अब चलने वाला नहीं है। जहां तक बिहार के एसआईआर की बात की जा रही है, हमने बार-बार कहा है और इतिहास भी इस बात का गवाह है कि यह पहली बार नहीं हो रहा है।
14वीं बार एसआईआर हो रहा है। हर सरकार के कार्यकाल में मतदाता सूची का पुनरीक्षण हुआ है। यह कोई नई बात है क्या? यह भी तय है कि आगे हर राज्य में एसआईआर होगा।
सवाल- आजकल विपक्ष एसआईआर की टाइमिंग को लेकर बड़े सवाल उठा रहा है, उसे लगता है कि चुनाव से ठीक पहले यह क्यों किया जा रहा है?
जवाब- यह तो वही बात हुई कि करो, तो समस्या न करो, तो समस्या। भारत सरकार और संविधान की संस्था चुनाव आयोग किसी पार्टी विशेष के अनुसार या किसी टाइमिंग के अनुसार नहीं चलती है।
चुनाव आयोग अपने सांविधानिक दायित्व के आधार पर चलता है। यह आयोग का फैसला है, इसलिए टाइमिंग को लेकर कोई सवाल ही नहीं उठता है। विपक्ष का सवाल बेमानी है।
सवाल- ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भी विपक्ष ने कई सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि हमारे कितने लड़ाकू विमान गिरे? इस पर आपका क्या कहना है?
जवाब- विपक्ष और विपक्ष के नेताओं की क्या विचारधारा है, ये उनके हालिया बयानों से साफ झलक जाता है। वे कहते हैं कि देश की न्यायपालिका मृत अवस्था में है।
चुनाव आयोग मृत अवस्था में है और देश की अर्थव्यवस्था भी मृत अवस्था में है। उनकी अपनी नकारात्मक सोच, अपनी नकारात्मक विचारधारा सलामत रहे। अभी मैं सिर्फ यही कहूंगा कि देश आज प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आगे बढ़ चुका है।
सवाल- संचार क्रांति की बात करें, तो आज हर व्यक्ति के हाथ में मोबाइल फोन है, लेकिन मोबाइल कॉल को लेकर खतरा भी पैदा हो गया कि कब कोई फर्जी कॉल का शिकार बन जाए, इससे निपटने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
जवाब- देखिए, जब कोई नई तकनीक आती है, तो लोगों को उसका फायदा होता है। संचार एवं सूचना प्रौद्यौगिकी के जरिये उत्पादकता में भारी वृद्धि भी हुई है। जहां लाखों-करोड़ों लोगों को इससे सुविधा होती है। वहीं, कुछ नकारात्मक प्रवृत्ति के लोग इसका दुरुपयोग करने लगते हैं।
ऐसी प्रवृत्ति के लोगों को रोकना सरकार का दायित्व है। मैं इस दायित्व को दो हिस्सों में रखता हूं। एक तो हर व्यक्ति तक दूरसंचार सुविधा का लाभ पहुंचे।
दूसरे ऐसे फर्जीवाड़ा करने वाले लोगों को रोका जाए। इसलिए सरकार त्वरित, सुरक्षित और समावेशी सेवा प्रदान करने के लिए तत्पर है।
इसी दिशा में काम कर रही है। दूरसंचार विभाग ने बहुत सारे कदम उठाए। पहला कदम, एक डिजिटल प्लेटफॉर्म हमने स्थापित किया है।
इस प्लेटफॉर्म पर आमजन से जुड़ी सभी सरकारी, गैर-सरकारी संस्थाओं की उपस्थित दर्ज कराई है। गृह मंत्रालय, कानून प्रवर्तन एजेंसी, करीब 28 राज्यों की पुलिस फोर्स, 570 बैंक और वित्तीय संस्थाएं पोर्टल से जुड़ी हुई हैं, जिससे अगर कोई फर्जीवाड़ा कर रहा है, तो सभी एजेंसियों को एक साथ सूचना चली जाती है।
सवाल- संचार क्रांति की बात करें, तो आज हर व्यक्ति के हाथ में मोबाइल फोन है, लेकिन मोबाइल कॉल को लेकर खतरा भी पैदा हो गया कि कब कोई फर्जी कॉल का शिकार बन जाए, इससे निपटने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
जवाब- देखिए, जब कोई नई तकनीक आती है, तो लोगों को उसका फायदा होता है। संचार एवं सूचना प्रौद्यौगिकी के जरिये उत्पादकता में भारी वृद्धि भी हुई है।
जहां लाखों-करोड़ों लोगों को इससे सुविधा होती है। वहीं, कुछ नकारात्मक प्रवृत्ति के लोग इसका दुरुपयोग करने लगते हैं। ऐसी प्रवृत्ति के लोगों को रोकना सरकार का दायित्व है।
मैं इस दायित्व को दो हिस्सों में रखता हूं। एक तो हर व्यक्ति तक दूरसंचार सुविधा का लाभ पहुंचे। दूसरे ऐसे फर्जीवाड़ा करने वाले लोगों को रोका जाए।
इसलिए सरकार त्वरित, सुरक्षित और समावेशी सेवा प्रदान करने के लिए तत्पर है। इसी दिशा में काम कर रही है। दूरसंचार विभाग ने बहुत सारे कदम उठाए। पहला कदम, एक डिजिटल प्लेटफॉर्म हमने स्थापित किया है।
इस प्लेटफॉर्म पर आमजन से जुड़ी सभी सरकारी, गैर-सरकारी संस्थाओं की उपस्थित दर्ज कराई है। गृह मंत्रालय, कानून प्रवर्तन एजेंसी, करीब 28 राज्यों की पुलिस फोर्स, 570 बैंक और वित्तीय संस्थाएं पोर्टल से जुड़ी हुई हैं, जिससे अगर कोई फर्जीवाड़ा कर रहा है, तो सभी एजेंसियों को एक साथ सूचना चली जाती है।
सवाल- आज एक बड़ा सवाल है कि आम लोग इस खतरे से निपटने के लिए क्या करें?
जवाब- हमने यह माना है कि यह लड़ाई अकेले सरकार या फिर टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स के दम पर नहीं लड़ी जा सकती। इसलिए आमजन को भी अपना योगदान इस लड़ाई में देना होगा। इसके लिए हमने 2023 में संचार साथी पोर्टल शुरू किया, जिससे आमजन को जोड़ा गया।
करीब 15.50 करोड़ हिट्स पोर्टल पर लोगों के आए हैं। उसी की सफलता को देखते हुए इस वर्ष मई में संचार साथी मोबाइल ऐप भी शुरू किया है। जहां पर करीब 55 से 60 लाख लोगों के हिट आए हैं। पोर्टल के जरिए यह सुविधा भी दी गई है कि लोग अपना नाम और आधार नंबर डालकर यह पता लगा सकें कि उनके नाम पर कोई फर्जी कनेक्शन तो नहीं चल रहा है।
यदि कोई ऐसा नंबर है, तो उसे पोर्टल के जरिये ही ब्लैकलिस्ट भी कराया जा सकता है। अब तक 1.75 करोड़ मोबाइल कनेक्शन काटे गए हैं।
इसके अलावा मोबाइल चोरी की रिर्पोटिंग भी पोर्टल पर होती है। करीब 35 लाख चोरी हुए मोबाइल की रिपोर्टिंग की गई। इनमें से 20 लाख मोबाइल का पता चल गया और 5 लाख बरामद कर उपभोक्ताओं को वापस दिए जा चुके हैं।
सवाल- फेक कॉल में कमी आई है, लेकिन मार्केटिंग से जुड़ी फोन कॉल रुक नहीं रही हैं। इसे लेकर क्या उपाय किए जा रहे हैं?
जवाब- हमने एसएमएस हैंडर्स और एसएमएस डेस्क्रिप्टर्स को ब्लॉक किया है, जो स्पैम के रूप आते थे। अंतरराष्ट्रीय स्पूफ कॉल्स को रोकने के लिए एक नया सॉफ्टवेयर इंटरनेशनल कॉलिंग आउटरोमिंग रजिस्ट्री (कायोर) लेकर आए। अब अगर कोई भी संस्था इंटरनेशनल कॉल को घरेलू के रूप में डायरेक्ट करेगी, तो उसे पकड़ लिया जाता है।
इस सॉफ्टवेयर ने एक दिन में करीब 1.35 करोड़ कॉल ब्लॉक किए थे। इतने सारे गेट-वे हमने ब्लॉक कर दिए, जिससे फर्जीवाड़ा करने वालों को भी आभास हो गया कि यह अब भारत में चल नहीं पाएगा। ऐसी कॉल 97 फीसदी घट गई हैं, सिर्फ 3 लाख रह गई हैं।
इसके अलावा हमने एक नया सॉफ्टवेयर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के आधार पर अस्त्र नाम से डिजाइन किया है। अस्त्र की मदद से अगर व्यक्ति के नाम पर अनेक सिम कार्ड्स लिए गए हैं, तो उनको हम ब्लॉक कर रहे हैं। इसके तहत 82 लाख सिम कार्ड को ब्लॉक किया है।
क्योंकि एक व्यक्ति सिर्फ नौ सिम कार्ड ही अपने नाम पर ले सकता है। इसी तरह से फाइनेंशियल फ्रॉड रिस्क इंडिकेटर (एफएफआरआई) सॉफ्टवेयर भी लांच किया है।
रिजर्व बैंक ने सभी बैंक और वित्तीय संस्थानों के लिए इसे अनिवार्य बना दिया है। इसके तहत करीब 1.04 लाख बैंक अकाउंट और 3 लाख ऐसे डेबिट कार्ड ब्लॉक किए गए हैं, जहां पर फर्जीवाड़े के जरिए लेन-देन होने की आशंका थी। हमने खतरे को तीन श्रेणियों – अत्यधिक उच्च, उच्च और मध्यम में ट्रैक किया है।
अगर कोई बैंक खाता उच्च खतरे की श्रेणी में है, तो उसकी सूचना तत्काल सारी एजेंसियों को डिजिटल इंसेंटिव इंटेलीजेंस प्लेटफॉर्म (डीआईपी) के जरिए भेजी जाती है, जिसके कि तत्काल बैंक खाते को ब्लॉक कर दिया जाए। इसी तरह से जो लोग मार्केटिंग कॉल नहीं चाहते हैं, उनको पूरा अधिकार है कि सेवा प्रदाता को कहें कि मुझे मार्केटिंग वाले कॉल नहीं चाहिए।
सवाल- अत्यधिक घाटे में जा चुका बीएसएनएल कैसे मुनाफे में आ गया? उसके विस्तार के लिए आगे क्या योजना है?
यह बीएसएनएल कर्मियों की मेहनत का ही नतीजा है। पिछले 18 सालों से बीएसएनएल घाटे में था। 2007 के बाद पिछले साल अक्तूबर-दिसंबर तिमाही में पहली बार 262 करोड़ का शुद्ध मुनाफा हुआ है। जनवरी से मार्च तिमाही में 280 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ है।
परिचालन के मुनाफे के आधार पर जहां 2023-24 में 2,128 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था, तो वहीं 2024-25 में 5,395 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ है। इस तरह से परिचालन मुनाफा 156 प्रतिशत बढ़ गया है।
यह एक ऐतिहासिक परिवर्तन है। करीब दो हफ्ते पहले सभी 32 जोन के मुख्य महाप्रबंधकों के साथ बैठक की है। इस बैठक में सभी को सीखने का अवसर मिला। कौन सा सर्किल बेहतर कर रहा है। उन्होंने अपने बिजनेस प्लान और वह किस तरह से बीएसएनएल को आगे बढ़ाना चाहते हैं, उसे लेकर गहनता के साथ चर्चा की गई
सवाल- बीएसएनएल 5जी सेवाएं कब से शुरू करने वाला है?
जवाब- बीएसएनएल अभी 4जी सेवा का तेजी से विस्तार कर रहा है, जो हमारी स्वदेशी तकनीक है। 91 हजार 4जी के टावर लग गए हैं।
सॉफ्टवेयर के साथ हम गुणवत्ता वाली सेवा के साथ आगे बढ़ रहे हैं। एक बार 4 जी नेटवर्क अच्छी तरह से स्थापित होकर काम करने लगे, उसके बाद 5जी पर काम करेंगे।
सवाल- 6 जी को लेकर भारत की क्या तैयारी है, कब तक आने की संभावना है?
जवाब- 6जी की अभी विश्व में तकनीक उत्पन्न नहीं हुई है। अभी स्टैंडर्ड सेटिंग का काम चल रहा है। भारत तकनीक के मामले में हमेशा पिछड़ता था।
4जी में हम लोग विश्व में पीछे थे। 5जी में हम विश्व के साथ चल रहे हैं और 6जी में हम विश्व को लीड करेंगे। देश में इस पर कार्य शुरू हो गया है।
अभी हाल में बेंगलुरु में भारत 6जी एलायंस की बैठक हुई है। देश में कुल 7 वर्टिकल्स में इस पर पेपर तैयार किए जा रहे हैं, जिनके आधार पर हम आगे बढ़ेंगे।
सवाल- दूरसंचार से जुड़े काफी उपकरण बाहर से आ रहे हैं, इधर, सीडॉट ने इस पर काफी काम किया है। क्या हम इन्हें वैश्विक स्तर ले जाने की दिशा में काम कर रहे हैं ?
जवाब- हमारी यही सोच है कि भारत के कदम सेवा गुरु से प्रोडक्ट गुरु की तरफ भी तेजी से बढ़ें। इसके लिए पीएलआई योजना की शुरुआत की है, जिसमें 42 कंपनियों ने शामिल होने का निर्णय लिया था, जिन्होंने अभी तक 80 हजार करोड़ की बिक्री की है। इसमें से 16 हजार करोड़ के निर्यात और 4,305 करोड़ का निवेश हुआ है।
कुल मिलाकर, करीब 28 हजार नौकरियां भी उत्पन्न हुई हैं। इससे दूरसंचार उपकरणों के उत्पादन क्षेत्र में नई ऊर्जा आई है। भारत अब दुनिया में एक उत्पादक देश के रूप में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
सवाल- पंजीकृत डाक यानि रजिस्ट्री सेवा बंद की जा रही है, इस पर आपका क्या कहना है?
जवाब- कुछ बंद नहीं हो रहा है। उसके सारे मानक यथावत रहेंगे। हम सिर्फ उसको स्पीड पोस्ट के साथ जोड़ रहे हैं। सिर्फ एक परिवर्तन होगा कि उसकी दक्षता बढ़ेगी। उसकी डिलीवरी बढ़ेगी और उसकी निगरानी बढ़ेगी। उपभोक्ता के लिए उच्चतम मानक हम तय करेंगे।
सवाल- पूर्वोत्तर राज्यों को लेकर काफी काम हुए हैं। आपके मंत्रालय के स्तर से अगर देखें, तो क्या नया हुआ है?
जवाब- हमने पूर्वोतर के राज्यों के लिए कई कदम उठाए हैं। बीते वर्ष नवंबर में अष्ट लक्ष्मी सांस्कृतिक समिट आयोजित की। जहां हर राज्य ने अपनी सांस्कृतिक क्षमता को विश्व के सामने रखा। उसके बाद दिसंबर में बैंकिग समिट आयोजित की गई, जहां सभी बैंक शामिल हुए।
इस वर्ष मई में पूर्वोत्तर निवेश समिट का आयोजन किया गया, जिसमें 4.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश एमओयू हमने किए। इस सरकार के समय, पूर्वोत्तर क्षेत्र को एक नई ऊर्जा मिली है। आज पूर्वोत्तर भारत के राज्य ग्रोथ इंजन के रूप में आगे बढ़ रहे हैं।
सवाल- भारत-अमेरिका के बीच टैरिफ को लेकर चल रही खींचतान का स्टारलिंक के भारत आने पर कोई असर तो नहीं पड़ेगा?
जवाब- हमने लाइसेंस दे दिया है। अब उस कंपनी के ऊपर है कि जल्द ही औपचारिकताओं को पूरा करें और अपनी सेवाएं शुरू करें। पोर्ट, वनवेब और जियो के लिए भी लाइसेंस जारी किया गया है। हम लोगों के हित में किसी भी तरह का समझौता नहीं करेंगे।