जल्द पुतिन से मिलेंगे डोनाल्ड ट्रंप, यूक्रेन में बढ़ी बेचैनी; आखिर किस बात का है डर?…

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि वह जल्द ही रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात करेंगे।

ट्रंप यूक्रेन में लड़ाई को खत्म करने के लिए युद्धविराम समझौते की मध्यस्थता करना चाहते हैं। वाइट हाउस में आर्मेनिया और अजरबैजान के साथ शांति समझौते की घोषणा के लिए सोमवार को शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ।

यहां बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि वह शुक्रवार को इस मीटिंग को लेकर लोकेशन सहित बाकी जानकारियां साझा करेंगे। उन्होंने संकेत दिया कि यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की इस बैठक में शामिल नहीं होंगे।

ट्रंप ने कहा, ‘हम रूस के साथ मीटिंग करने जा रहे हैं। इसकी शुरुआत रूस से होगी और हम एक स्थान की घोषणा करेंगे। मुझे लगता है कि यह जगह कई कारणों से बहुत लोकप्रिय होगी।’

पुतिन के साथ आमने-सामने की बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए जोखिम भरा दांव माना जा रहा है। दरअसल, चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने युद्ध को जल्दी समाप्त करने का वादा किया था, लेकिन उनके प्रयास बार-बार बाधित होते रहे हैं।

ट्रंप ने शुक्रवार को कहा, ‘मेरा मानना है कि हम शांति समझौते के बहुत करीब पहुंच रहे हैं।’ इस बीच, यूक्रेन के सहयोगी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि पुतिन को ट्रंप बहुत अधिक रियायतें देने के लिए तैयार हो सकते हैं।

रूसी सेना ने 2014 में यूक्रेन के काला सागर प्रायद्वीप क्रीमिया को अवैध रूप से कब्जा कर लिया था। साथ ही पूर्वी और दक्षिणी यूक्रेनी क्षेत्रों डोनेट्स्क, लुहान्स्क, जापोरिज्जिया और खेरसॉन पर अपना दावा किया है, जिन्हें उनकी सेनाएं पूरी तरह से नियंत्रित नहीं करती हैं।

बैठक का लाभ उठा सकते हैं पुतिन

रूसी राष्ट्रपति पुतिन यूक्रेन युद्ध में रूस की अडिग मांगों से टस से मस नहीं हुए हैं। इससे आशंका बढ़ गई है कि वह ट्रंप के साथ बैठक का इस्तेमाल कीव को प्रतिकूल समझौते को स्वीकार करने के लिए कर सकते हैं।

रूस की जो मांगें हैं, वे उन लक्ष्यों को प्राप्त करने के पुतिन के दृढ़ संकल्प को दर्शाती हैं, जो उन्होंने 24 फरवरी, 2022 को यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर आक्रमण शुरू करते समय तय किए थे।

ट्रंप के साथ बैठक को पुतिन एक ऐसे समझौते पर बातचीत करने के अवसर के रूप में देखते हैं, जो न केवल रूस के क्षेत्रीय लाभ को मजबूत करेगा, बल्कि यूक्रेन को नाटो में शामिल होने और उसे किसी भी पश्चिमी सेना की मेजबानी करने से भी रोकेगा। इससे रूस को धीरे-धीरे यूक्रेन को अपने प्रभावक्षेत्र में वापस लाने में मदद मिलेगी।

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