गाजा पर पूर्ण कब्जे के इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के प्लान के बीच इजरायली सुरक्षा बल वहां ताबड़तोड़ हमले कर रहे हैं।
इन हमलों में अल जज़ीरा के कम से कम पाँच पत्रकार मारे गए हैं।
अल जज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, गाजा शहर के अल-शिफा अस्पताल के मुख्य द्वार के बाहर प्रेस के लिए एक तंबू को निशाना बनाकर किए गए इजरायली हमले में मारे गए सात लोगों में पांच पत्रकार भी शामिल थे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पीड़ितों में अल जज़ीरा के संवाददाता अनस अल-शरीफ और मोहम्मद क़रीक़ेह, साथ ही कैमरामैन इब्राहिम ज़हीर, मोआमेन अलीवा और मोहम्मद नौफ़ल शामिल हैं।
इस हमले के तुरंत बाद, इजरायली सेना ने एक बयान में अल जज़ीरा के संवाददाता अनस अल-शरीफ को निशाना बनाने की बात स्वीकार की है और उसे आतंकवादी करार देते हुए कहा कि वह हमास में एक आतंकवादी सेल के प्रमुख के रूप में काम कर चुका था।
मौत से पहले बमबारी की रिपोर्टिंग
28 वर्षीय अल-शरीफ अपनी मौत से कुछ क्षण पहले ही गाजा शहर पर हो रहे तीव्र इजरायली बमबारी की रिपोर्टिंग करते हुए दिखाई दिए।
सोशल मीडिया एक्स पर शरीफ ने इस हमले की रिपोर्टिंग करते हुए एक पोस्ट जारी किया था।
अल जजीरा की रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसा प्रतीत होता है कि यह पोस्ट उनके एक मित्र द्वारा पोस्ट की गई है, जो उनके अकाउंट से उनकी मौत की सूचना मिलने के बाद प्रकाशित की गई है।
बैकग्राउंड में इजरायल के भीषण बमबारी की तेज आवाज
अल-शरीफ के पोस्ट में लिखा गया है, “अगर मेरे ये शब्द आप तक पहुंचें तो जान लें कि इजरायल मुझे मारने और मेरी आवाज को दबाने में सफल हो गया है।”
अल-शरीफ के आखिरी वीडियो के बैकग्राउंड में इजरायल के भीषण बमबारी की तेज आवाज सुनी जा सकती है, जबकि अंधेरा आकाश नारंगी रोशनी की चमक से जगमगा रहा है।
धारदार रिपोर्टिंग करने के कारण निशाना बनाया गया
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि अल-शरीफ को गाजा युद्ध की धारदार रिपोर्टिंग करने के कारण निशाना बनाया गया है और इजरायल के पास उसके आतंकी होने के कोई सबूत नहीं है।
अल जज़ीरा ने अल शरीफ़ को गाज़ा के सबसे बहादुर पत्रकारों में से एक बताते हुए कहा कि यह हमला गाज़ा पर कब्ज़े की आशंका में उठ रही आवाज़ों को दबाने की एक हताश कोशिश है। पत्रकार समूहों और अल जज़ीरा ने हत्याओं की निंदा की।
दूसरी तरफ, इजरायली सेना ने एक बयान में कहा कि अल शरीफ़ हमास सेल का प्रमुख था और इजरायली नागरिकों और आईडीएफ (इज़रायली) सैनिकों पर रॉकेट हमलों को बढ़ावा देने के लिए ज़िम्मेदार था।
इस बयान में गाज़ा में मिली ख़ुफ़िया जानकारी और दस्तावेज़ों को सबूत के तौर पर उद्धृत किया गया है।