असम सरकार द्वारा मूल निवासियों को हथियार लाइसेंस देने की योजना पर सीएम हिमंत पर लगातार सवाल उठाए जा रहे है।
इस आलोचना के बीच रविवार को अपने फैसले का बचाव करते हुए सीएम हिमंत ने कहा कि मूल निवासियों के हथियार लाइसेंसों के साथ-साथ भूमि अधिकार भी सुरक्षित किए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी को भी ऐसी ही हथियार नहीं दे दिए जाएंगे, इसे पूरी प्रक्रिया के तहत और उचित जांच के बाद ही किया जाएगा।
असम के बक्सा में एक कार्यक्रम के दौरान जब उनसे हथियार नीति को लेकर हो रही आलोचना के बारे में पूछा गया तो हिमंत ने इसका अपने अंदाज में जवाब दिया।
उन्होंने कहा, “बंदूकें जरूरी हैं। अगर आपके पास बंदूक नहीं है, तो आप दक्षिण सलमान-मनकाचर और बागबार में कैसे रहेंगे? अगर आप वहां जाएंगे तो आपको खुद ही समझ आ जाएगा।”
हिमंत ने दावा किया कि एक सत्र (वैष्णव शिक्षा का केंद्र) में 100 मूल निवासी रह रहे हैं। उनके आस पास 20 से 25 हजार लोग रहते हैं, तो उन 100 लोगों को किसी चीज की आवश्यकता तो पड़ेगी ही।
हालांकि सरमा ने कानून के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कह, “बंदूकें जरूरी हैं, जमीन जरूरी है, अधिकार जरूरी हैं, लेकिन यह सब केवल और केवल कानून के दायरे में होना चाहिए… कानून के बाहर नहीं।”
गौरतलब है कि असम राज्य मंत्रिमंडल ने 28 मई को फैसला किया था कि असुरक्षित और दूर दराज इलाकों में रहने वाले मूल निवासियों में सुरक्षा की भावना पैदा करने के लिए उन्हें लाइसेंसी हथियार दिए जाएंगे।
इस योजना के तहत सरमा सरकार ने धुबरी, मोरीगांव, बारपेटा, नागांव, दक्षिण सलमारा-मनकाचर जिलों और इसके अलावा रुपाही, ढिंग और जोनिया जैसे इलाकों को असुरक्षित और दूर दराज के इलाकों में चिह्नित किया था। इन सभी इलाकों में बंगाली मुसलमान अधिक संख्या में रहते हैं।