Mahakaal: महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल को राखी बांधकर रक्षाबंधन पर्व की हुई शुरुआत…

मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल को राखी बंधने के साथ ही रक्षाबंधन पर्व की शुरुआत हो गई है,मान्यता है की हिन्दू रीति से मनाए जाने वाले सभी पर्व की शुरुआत बाबा महाकालेश्वर मंदिर से होती है, शनिवार तड़के मंदिर में भस्मारती के दौरान भगवान महाकाल को एक लाख से अधिक लड्डुओं का महाभोग भी लगाया गया।

जिसे प्रसाद में शामिल कर भस्मारती के पश्चात सुबह दर्शन को आने वाले श्रद्धालुओं में वितरण किया जा रहा है। बताया जाता है कि श्रावण पूर्णिमा रक्षाबंधन के अवसर पर श्री महाकालेश्वर मंदिर में पुजारी परिवार द्वारा बाबा महाकाल को राखी अर्पित की जाती है और यह राखी पुजारी परिवार की महिलाएं भगवान महाकाल को बांधती है।

इसके लिए पिछले एक हफ्ते से भगवान महाकाल को अपना भाई मानकर राखी बना रही है। इस बार की राखी में मखमल का कपड़ा, रेशमी धागा और मोती का उपयोग कर राखी पर भगवान गणेश जी को विराजित किया है।

उज्जैन में 9 अगस्त को तड़के 3 बजे बाबा महाकाल की भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल को पुजारी परिवार की ओर से राखी अर्पित की गई इसके साथ ही देशभर में रक्षाबंधन की शुरुवात हो गई,शनिवार को सबसे पहले तड़के 3 बजे भस्म आरती के लिए पट खोले गए।

इसके बाद पंचामृत से अभिषेक किया गया। भस्म आरती के दौरान ही उन्हें विशेष श्रृंगार के साथ राखी अर्पित की गई।भगवान महाकाल को राखी बांधने बाद भस्मआरती के दौरान ही सवा लाख लड्डुओं का महाभोग लगाया गया। इस बार रक्षा बंधन खास संयोग के साथ मनाया जाएगा ऐसा योग 297 साल बाद बना है।

भाई-बहन के प्रेम के प्रतीक का ये पर्व इस बार श्रवण नक्षत्र, सौभाग्य योग, करण, मकर राशि में चंद्रमा और पूर्णिमा तिथि में मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, रक्षाबंधन पर शनिवार को दोपहर 2:43 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा।

यह किसी भी काम को सफल बनाने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस बार ये भी खास है कि रक्षाबंधन भद्रा काल से मुक्त रहेगा।

मुहूर्त और चौघड़िए के अनुसार रक्षा सूत्र या राखी बांधी जा सकेगी। इस दृष्टि से सुबह से दोपहर 2:40 तक शुभ मुहूर्त में रक्षा बंधन का पर्व मनाया जा सकेगा। इस साल राखी महाकाल मंदिर के पुजारी अमर पुजारी के परिवार की महिलाओ ने बनाई है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पंडित अमर डिब्बेवाला ने कहा- ग्रहों की वर्तमान स्थिति 1728 में बने दुर्लभ संयोग को दोहरा रही है। रक्षाबंधन पर 8 ग्रह उन्हीं राशियों में रहेंगे, जिनमें 1728 में थे। इनमें सूर्य कर्क, चंद्र मकर, मंगल कन्या, बुध कर्क, गुरु और शुक्र मिथुन, राहु कुंभ और केतु सिंह राशि में रहेंगे। ऐसे अद्भुत योग शताब्दियों में एक बार ही बनते हैं।

जिससे इस बार का रक्षाबंधन और भी पुण्य फलदायी माना जा रहा है। पुजारी के परिवार की महिलाओं द्वारा तैयार की गई खास राखी उन्हें अर्पित की गई है। महाकाल को जो राखी बांधी गई है उसमें मखमल का कपड़ा, रेशमी धागा और मोती का उपयोग हुआ है। राखी पर भगवान गणेश जी विराजित हैं।

पुजारी महेश शर्मा ने बताया कि रक्षा बंधन पर्व पर भस्म आरती में भगवान को राखी अर्पित की गई और सवा लाख लड्डुओं का भोग लगाया गया।लड्डू निर्माण करने वाले हलवाई ओम प्रकाश शर्मा ने बताया कि वे पिछले 12 वर्षों से रक्षाबंधन पर्व पर महाकाल के लिए लड्डू बना रहे हैं।इस महाभोग की तैयारी पिछले चार दिनों से चल रही है।मंगलवार से ही मंदिर में पुजारी कक्ष के पीछे भट्टी पूजन के साथ लड्डू बनाना शुरू हो गया था।

पंडित अमर पुजारी ने बताया कि हर त्योहार की शुरुआत भगवान महाकाल के दरबार से होती है। इसी क्रम में सबसे पहले राजाधिराज भगवान श्री महाकालेश्वर को राखी बांधी गई। वर्षों से चली आ रही परंपरा का निर्वहन भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल को राखी बांधकर किया जाता है।

नंदी हॉल और गर्भगृह में फूलों से आकर्षक सजावट की जाती है। इसके बाद सवा लाख लड्डुओं का महाभोग बाबा को अर्पित किया जाता है। रक्षाबंधन पर्व पर महाकाल मंदिर में दर्शन करने आने वाले भक्तों को लड्डू प्रसाद वितरित किया जाता है।

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