अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर टैरिफ की घोषणा के बाद यह विवाद काफी बढ़ता जा रहा है।
ट्रंप ने गुरुवार को टैरिफ घोषणा के बाद भारत के साथ पहले से जारी व्यापार वार्ता को आगे बढ़ाने की संभावना से इनकार कर दिया।
अमेरिका के राष्ट्रपति के इस नए बयान के बाद लंबे समय से मजबूत हो रहे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं।
ओवल ऑफिस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वह भारत के ऊपर 50 फीसदी टैरिफ की घोषणा के बाद व्यापार वार्ता को जारी रखेंगे।
इस पर ट्रंप ने कहा, “जब तक हम इस मुद्दे को सुलझा नहीं लेते, तब तक ऐसा नहीं होगा।” राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इससे पहले रूस के साथ तेल खरीद करने वाले देशों के ऊपर सेकेंडरी टैरिफ लगाने की चेतावनी के बाद आई है।
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति के व्यापारिक सलाहकार ने भी भारत पर लगाए गए टैरिफ को लेकर अपनी बात रखते हुए भारत को ‘टैरिफ का महाराज’ बताते हुए भारत पर लगाए गए टैरिफ को सही ठहराने की कोशिश की थी।
वहीं रूसी तेल खरीद के लिए चीन पर टैरिफ नहीं लगाए जाने को लेकर उन्होंने कहा था कि अमेरिका चीन पर पहले से ही उस हद तक टैरिफ लगा चुका है।
अगर इसे ज्यादा टैरिफ लगाए जाते हैं तो वह अमेरिका को ही दिक्कत देने लगेगा।
गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को एक आदेश पर हस्ताक्षर किए। इस आदेश के तहत उन्होंने भारतीय सामानों पर 25 प्रतिशत टैरिफ के अलावा और 25 फीसदी टैरिफ की घोषणा की।
ट्रंप ने 25 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ रूस के साथ लेत खरीद करने पर दंड के तौर पर लगाया है। इससे अमेरिका में जाने वाले भारतीय सामान के ऊपर 50 फीसदी का टैरिफ लगाया जाएगा। यह दोनों टैरिफ 27 अगस्त से लागू हो जाएंगे।
टैरिफ बढ़ाए जाने को लेकर भारत ने सधी हुई लेकिन सटीक प्रतिक्रिया दी। भारत ने इस कदम की आलोचना करते हुए इसे अनुचित, अविवेकपूर्ण बताया।
भारतीय विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि भारत अपने हितों की रक्षा के लिए कुछ भी करेगा। वहीं दूसरी तरफ पीएम मोदी ने भी अमेरिका या ट्रंप का नाम लिए बिना गुरुवार को कहा कि भारत अपने हितों की रक्षा के लिए कुछ भी करेगा।
उन्होंने कहा, “इसके लिए भले ही मुझे निजी कीमत चुकानी पड़े लेकिन भारत अपने किसानों और मछुआरों के हितों के साथ समझौता नहीं करेगा।”