युद्ध के बीच छोटे से देश का बड़ा बयान: हमें किसी तीसरे की जरूरत नहीं, अमेरिका-चीन को दिया दो टूक जवाब…

थाइलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा विवाद को लेकर दो दिनों से चल रही जंग और भीषण हो गई है।

अब तक 14 लोगों की जान जा चुकी है और मृतकों में ज्यादातर आम नागरिक हैं। दोनों देशों के सैनिकों ने सीमा पर एक दूसरे के खिलाफ गोलीबारी की। दोनों ने छोटे हथियारों से फायरिंग करते हुए तोप से गोले दागे और रॉकेट हमले किए।

जंग बढ़ती देख अमेरिका, चीन और मलेशिया ने मध्यस्थता के लिए ऑफर दिया था, जिसे थाइलैंड जैसे छोटे से देश ने चीन और अमेरिका को टका सा जवाब दे दिया।

थाइलैंड ने साफ कर दिया कि उसे किसी तीसरे की जरूरत नहीं है। हालांकि, बाद में मलेशिया का ऑफर स्वीकार कर लिया है।

थाइलैंड के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि उसने कंबोडिया के साथ चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए अन्य देशों की मध्यस्थता के प्रयासों को अस्वीकार कर दिया है और इस बात पर जोर दिया है कि नोम पेन्ह हमले बंद करे और स्थिति का समाधान केवल द्विपक्षीय वार्ता के जरिए ही हो।

थाइलैंड के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता निकोर्न्डेज बालनकुरा ने रॉयटर्स को बताया कि संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन और मलेशिया (जो आसियान क्षेत्रीय ब्लॉक का वर्तमान अध्यक्ष है) ने बातचीत को सुविधाजनक बनाने की पेशकश की है, लेकिन बैंकॉक संघर्ष का द्विपक्षीय समाधान चाहता है।

थाइलैंड के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता निकोर्न्डेज बालनकुरा ने रॉयटर्स को बताया, ”मुझे नहीं लगता कि हमें अभी किसी तीसरे देश की मध्यस्थता की जरूरत है।

निकोर्नडेज ने कहा, “हम अपने इस रुख पर कायम हैं कि द्विपक्षीय व्यवस्था ही सबसे अच्छा समाधान है, यह दोनों देशों के बीच टकराव है।” उन्होंने आगे कहा कि कंबोडियाई पक्ष को पहले सीमा पर हिंसा रोकनी चाहिए। हमारे दरवाजे अभी भी खुले हैं।”

हालांकि, पहले ऑफर को ठुकराने के बाद थाइलैंड सरकार युद्धविराम का समर्थन करने के मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए तैयार हो गई है।

विदेश मंत्रालय ने एक्स पर लिखा, ”कोई भी युद्धविराम उचित जमीनी परिस्थितियों पर आधारित होना चाहिए। थाइलैंड नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है और इस समय, कंबोडिया की कार्रवाइयां सद्भावना की कमी को दर्शाती हैं और नागरिकों को खतरे में डाल रही हैं।

शाही थाइ सरकार का दायित्व है कि वह अपनी संप्रभुता और अपने लोगों की पूरी तरह से रक्षा करे।” वहीं, थाइलैंड के अधिकारियों ने कंबोडिया की सीमा से लगे आठ जिलों में मार्शल लॉ लागू कर दिया क्योंकि झड़पें दूसरे दिन भी जारी रहीं।

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