रूस का एक मात्र एयरक्राफ्ट कैरियर शिप ऐडमिरल कुज्नेत्सोव जल्द ही कबाड़ में बेच दिया जाएगा।
इस शिप को 1985 में रूसी नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया था। रूस की नौसेना का यह सबसे पुरानी निशानी कहा जा सकता है।
लंबे समय से इस शिप को मुरमान्स्क इलाके में ऐंकर कर दिया गया है। इस शिप को अब ‘शिप ऑफ शेम’ कहा जाने लगा है।
रूस की सरकारी शिपबिल्डिंग कंपनी के चेयरमैन ऐंड्रेई कोस्तिन ने कहा कि इस शिप को लेकर अभी फाइनल फैसला नहीं लिया गया है।
हालांकि इस शिप का कोई भविष्य नहीं है। इसे एक दिन कबाड़ में ही बेंचना पड़ेगा। कोस्तिन ने कहा, अब इसे और ज्यादा रिपेयर करने का कोई विचार नहीं है।
यह 40 साल पुराना हो चुका है। अब या तो इसे कबाड़ में बेचा जा सकता है या फिर डिस्पोज करके इसके पार्ट्स का कुछ बनाया जा सकता है।
इसी महीने एक रूसी अखबार में छपा था कि ऐडमिरल कुज्नेत्सोव पर लंबे समय से काम चल रहा था, जिसे रोक दिया गया है।
इस युद्धपोत की अहमियत रूस के लिए बहुत है क्यों कि यह तब बनाया गया था जब सोवियत यूनियन पश्चिम में अपनी ताकत बढ़ा रहा था।
सोवियत संघ के विघटन के बाद यह रूसी नौसेना का हिस्सा बन गया। सीरिया में सिविल वॉर के समय इस युद्धपोत से फाइटर जेट उड़ाए गए थे। रूस उस समय राष्ट्रपति बशर अल असद का साथ दे रहा था।
‘शिप ऑफ शेम’ कैसे पड़ गया नाम
रूस की नौसेना के जानकार और नौसैनिक इस युद्धपोत को लेकर अलग-अलग विचार रखते हैं। कुछ लोगों का कहना है कि यह शिप बहुत पुराना हो चुका है इसलिए आधुनिक तरीके से काम नहीं कर सकता।
वहीं कुछ लोगों का कहना है कि रूस की नौसेना की निशानी की तौर पर इसे रखना चाहिए। बता दें कि साल 2017 में यह शिप काला धुआं छोड़ते हुए ब्रिटिश कोस्ट के पास से गुजर रहा था। तभी यूके के रक्षा मंत्री ने इसे ‘शिप ऑफ शेम’ नाम दे दिया।