धनखड़ ने पार की थी अपनी सीमाएं, इसलिए देना पड़ा इस्तीफा: राज्यसभा सांसद का दावा…

उपराष्ट्रपति पद से जगदीप धनखड़ के इस्तीफे को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं।

अब राज्यसभा सांसद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम का दावा है कि धनखड़ को ‘सीमा लांघने’ के चलते इस्तीफा देना पड़ा है।

साथ ही उन्होंने इस्तीफे के तार जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ प्रस्ताव से भी जोड़े हैं। इधर, धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर त्यागपत्र सौंपा है।

चिदंबरम ने कहा कि धनखड़ को इस्तीफा देना पड़ा क्योंकि ‘वह अपनी सीमा पार कर गए थे और जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ प्रस्ताव स्वीकार कर सरकार को चुनौती दी थी।’

उनका दावा है कि शायद इसके चलते ही उनके और सरकार के बीच रिश्ते तनावपूर्ण हुए थे। उन्होंने कहा, ‘सरकार ने एक बार धनखड़ में भरोसा खो दिया, तो उन्हें जाना होगा।’

इस दौरान उन्होंने धनखड़ के इस्तीफे के बारे में राज्यसभा में हुई छोटी और औपचारिक घोषणा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह इस बात का सबूत है कि दोनों पक्षों में सम्मान नहीं बचा था।

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘उप सभापति ने उपराष्ट्रपति पद के रिक्त होने की छोटी और औपचारिक घोषणा राज्यसभा में की। और कहा कि शेड्यूल की घोषणा बाद में की जाएगी।’

चिदंबरम ने आगे कहा, ‘इसका मतलब है कि सरकार बगैर किसी विदाई के धनखड़ को विदा कर दिया था। इस बात का मतलब यह भी है कि दोनों के बीच भरोसे के तार टूट चुके थे।’

कांग्रेस ने मांगी सफाई

कांग्रेस ने मंगलवार को कहा कि उपराष्ट्रपति पद से जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किए गए सोशल मीडिया पोस्ट से इस बारे में रहस्य और गहरा गया कि धनखड़ को पद क्यों छोड़ना पड़ा तथा ऐसे में सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

मुख्य विपक्षी दल ने यह भी कहा कि धनखड़ के इस्तीफा देने के पीछे उनके द्वारा बताए गए स्वास्थ्य कारणों के अलावा कोई और अधिक गहरे कारण हैं। धनखड़ का कार्यकाल अगस्त 2027 तक था।

प्रधानमंत्री मोदी ने धनखड़ के इस्तीफे के बाद मंगलवार को कहा कि उन्हें कई भूमिकाओं में देश की सेवा का मौका मिला है और वह उनके उत्तम स्वास्थ्य की कामना करते हैं।

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