सावन में आज भौम प्रदोष और मंगला गौरी व्रत का शुभ संयोग, सुबह करें व्रत कथा का पाठ और प्रदोष काल में शिव पूजन…

प्रियंका प्रसाद (ज्योतिष सलाहकार): केवल व्हाट्सएप मेसेज 94064 20131

श्रावण कृष्ण पक्ष उदय कालिक द्वादशी तिथि उपरांत त्रयोदशी तिथि 22 जुलाई 2025 दिन मंगलवार को रखा जा रहा है।

प्रदोष व्रत मंगलवार को पड़ता है तब इस प्रदोष को भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस बार सावन में भौम प्रदोष और मंगला गौरी व्रत का अद्भुत संयोग है।

एक तरफ भौम प्रदोष व्रत से कर्जमुक्ति, धन वृद्धि की मनोकामनाएं की जाएंगी, वहीं महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य के लिए मंगला गौरी व्रत करेंगी।

इसके अलावा जिनकी कुंडली में मंगल कमजोर होता है, उन्हें भी यह व्रत रखना चाहिए। इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती, हनुमान जी और मंगलदेव की कृपा मिलती है।

आज त्रयोदशी का मान पूरे दिन रहेगा। 22 जुलाई को सुबह सुबह 5:48 बजे से लेकर रात में 3:44 तक त्रयोदशी तिथि है। आप को बता दें कि मंगला गौरी व्रत महिलाएं अखंड सौभाग्य, वैवाहिक सुख, परिवार की खुशहाली के लिए रखती है।

यह सावन के हर मंगलवार को रखा जाता है। आज दूसरा मंगला गौरी व्रत है, इसके बाद तीसरा मंगला गौरी व्रत 29 जुलाई और चौथा मंगला गौरी व्रत पांच अगस्त को रखा जाएगा।

भगवान शिव का जलाभिषेक

मंगला गौरी व्रत सावन मास के हर मंगलवार को सुहागिन महिलाएं अपनी पति की लंबी आयु के लिए यह व्रत करती हैं। प्रदोष व्रत और मंगला गौरी व्रत दोनों में भगवान शिव का जलाभिषेक जरूर करना चाहिए।

इस दिन सुहागिन महिलाएं सुबह स्नान कर विधि-विधान से चौकी पर भगवान शिव और मां गौरी की मूर्ति रखकर, मंगला गौरी कथा सुनती है।

इस व्रत में भोलेनाथ के साथ मां गौरी की विशेष पूजा की जाती है। प्ररे दिन व्रत रखा जाता है और सिर्फ एक समय भोजन करना चाहिए। इस दिन भगवान शिव को बेलपत्र, भांग, धतूरा, दूध अर्पित करना चाहिए। भगवान शिव माता पार्वती के किसी भी मंत्र का अथवा महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए।

भगवान शिव और माता पार्वती की प्रदोष व्रत की पूजा शाम को करना फलदायी रहता है, इसलिए प्रदोष व्रत की पूजा के लिए श्रेष्ठ समय शाम 7.00 बजे से रात 9.00 बजे तक है। लेकिन मंगला गौरी व्रत की कथा सुबह ही सुनी जाएगी।

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