छत्तीसगढ़; धमतरी: शिक्षा से खिलवाड़! कौन ज़िम्मेदार?  पहले मासिक मूल्यांकन की तिथि घोषित, छात्रों के हाथों से अब तक दूर नई पुस्तकें!…

सैयद जावेद हुसैन (सह संपादक – छत्तीसगढ़):

धमतरी- जिले में स्कूल खुले 2 माह बीतने वाले हैं, ऐसे में जिला परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा विभाग धमतरी द्वारा जिले के सभीप्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों के लिए मासिक मूल्यांकन परीक्षा की समय सारिणी तय कर दी गई है।

जारी समय सारिणी के अनुसार कक्षा पहली से लेकर आठवीं तक का मासिक मूल्यांकन 28 जुलाई 2025 से प्रारंभ होने वाला है।

वहीं कक्षा पांचवीं के बच्चों के लिए जवाहर नवोदय विद्यालय अभ्यास परीक्षा 30 जुलाई 2025 को प्रातः 11 बजे से आयोजित की जाएगी। इसके अलावा कक्षा आठवीं के विद्यार्थियों के लिए राष्ट्रीय साधन सह योग्यता छात्रवृत्ति परीक्षा (NMMSE) 31 जुलाई 2025 को दोपहर 12 से 1 बजे के बीच आयोजित की जाएगी। 

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यहां आपको बता दें कि समग्र शिक्षा विभाग द्वारा जारी समय सारिणी में एक बिंदु में शालाओं को जानकारी दी गई है कि कक्षा पहली, तीसरी व छठवीं में नवीन पाठ्यक्रम लागू होने के बाद शालाओं में पुस्तकों की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने के कारण माह जुलाई के मासिक मूल्यांकन के लिए प्रश्न पत्रों का निर्माण शाला द्वारा किया जाएगा!

और बिंदु क्र. 2 में निर्देशित किया गया है कि कक्षा 4- 5- 7- 8 के लिए ज़िला स्तर से प्रश्न पत्रों का PDF शालाओं को उपलब्ध कराया जाएगा। 

इस समय सारिणी को शिक्षा विभाग और पाठ्य पुस्तक निगम की पोल खोलने और उनकी लेटलतीफी भरे रवैया का प्रमाण माना जा रहा है। 

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ज्ञात हो कि अब तक शालाओं में पुस्तकों की पर्याप्त उपलब्धता नहीं हो पाई है, जो विद्यार्थियों के भविष्य से सीधा खिलवाड़ माना जा रहा है क्योंकि पहले मासिक मूल्यांकन की तिथि घोषित हो चुकी है बावजूद छात्रों के हाथों तक पुस्तकों का न पहुंचना उनकी शिक्षा और भविष्य से खिलवाड़ का प्रमाण माना जा रहा है।

ऐसे में बड़ा सवाल है कि विद्यार्थियों को किस आधार पर अब तक की शिक्षा दी जा रही है? और जो शिक्षा दी जा रही है उसी आधार पर उनका मासिक मूल्यांकन किया जाएगा! जबकि पाठ्यक्रम में बदलाव हो चुका है, तो बदले हुए पाठ्यक्रम से तब तक पढ़ाई नहीं की जा सकती जब तक पुस्तकें बच्चों के हाथों तक न पहुंच जाए! बदले हुए पाठ्यक्रम और वर्तमान में शिक्षकों द्वारा बच्चों को दी जा रही शिक्षा में यदि समानता नहीं पाई गई, तो बच्चों के परीक्षा परिणाम में इसका सीधा असर दिखाई देगा, वहीं बच्चों समेत शिक्षकों को भी ये चुनौती होगी कि कैसे उनके सिलेबस को पूरा किया जाए?

शिक्षा विभाग के इस ढीले रवैया से कई बच्चों के पालक काफी नाराज़ हैं, जो एक आंदोलन करने का मूड बना रहे हैं। वहीं बहुत से शिक्षकों का भी हाल कुछ ठीक नहीं।

विकासखंडवार देखें… 

किस विकासखंड में किस विषय की कौन सी पुस्तक अब तक नहीं पहुंच पाई है…

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