सैयद जावेद हुसैन (सह संपादक – छत्तीसगढ़):
धमतरी- जिले का एक ऐसा गांव जहां आज़ाद भारत के छठवें प्रधानमंत्री खुद पहुंचे थे, कमार जनजाति के लोगों के घर में भोजन किया था, और इतना ही नहीं इस गांव को वे गोद भी लिए थे।
हम बात कर रहे हैं जिले के वनांचल में स्थित ग्राम दुगली की, जहां तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी अपनी पत्नी सोनिया गांधी के साथ 14 जुलाई 1985 में यहां पहुंचे थे, जब बतौर प्रधानमंत्री उनका कार्यकाल शुरू हुए सिर्फ 9 माह ही हुआ था उन्होंने यहां के लोगों के साथ समय बिताया, ग्रामीणों की सैकड़ों समस्याओं को गंभीरता से लिया, और आश्वासन दिया कि वे इस गांव को एक आदर्श ग्राम बनाने में कोई कमी नहीं छोड़ेंगे।
आज लगभग 40 साल बाद भी उस गांव की प्राथमिक शाला बीते 2 सालों से शिक्षकों की कमी से जूझ रही है। सोमवार को कलेक्टर जनदर्शन में गुहार लगाने पहुंचे पालकों का कहना है कि ग्राम दुगली में प्राथमिक शाला सन् 1927 (ब्रिटिश काल) से संचालित है, चूंकि अब प्रशासन के नियमानुसार युक्तियुक्तकरण के तहत आश्रम प्राथमिक शाला दुगली को प्राथमिक शाला दुगली में समायोजन किया गया है। समायोजन के बाद प्राथमिक शाला दुगली में विद्यार्थियों की कुल दर्ज संख्या 85 है जिसमें विशेष पिछड़ी जनजाति के (कमार) बच्चे भी अध्ययनरत है। केन्द्र एवं राज्य शासन के द्वारा इनके लिए विशेष सुविधा एवं कई योजना चलाई जा रही है, बावजूद इसके यहां पर वर्तमान में एक ही शिक्षिका पदस्थ है एकल शिक्षकीय शाला होने के कारण शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। जिससे विद्यार्थियों के भविष्य पर खतरा मंडराने लगा है।
अपनी इस गंभीर मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंची महिला कलाबती मरकाम ने बताया कि शाला में एक ही शिक्षिका है जिनका आधे से ज्यादा समय कार्यालयीन कार्य में ही निकल जाता है, जिसके कारण वह भी पूरी तरह से विद्यार्थियों को अध्यापन कार्य नहीं करवा पा रही है। जबकि ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या से बीते लगभग 2 सालों से विद्यार्थी जूझ हैं, जिसके कारण शाला के परीक्षा परिणाम भी बदतर होते जा रहे हैं।
ग्राम दुगली से लगभग 50 की संख्या में कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग समेत जिला प्रशासन को चेतावनी दिए हैं कि यदि 17 जुलाई तक शिक्षकों की व्यवस्था नहीं की गई तो 18 जुलाई दिन शुक्रवार को वे स्कूल में तालाबंदी करने बाध्य होंगे, जिसकी जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी।
लगभग 6000 शिक्षकों पर 1079 शाला निर्भर…
शिक्षा विभाग के अनुसार जिले में पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं, यही वजह है कि जिले की बहुत सी शालाओं में शिक्षकों कमी की आवाज़ बुलंद होती रहती है, जिसका खामियाजा उन शालाओं के विद्यार्थियों को भुगतना पड़ता है। इसका प्रमाण है कि नए शिक्षा सत्र शुरू होने के बाद लगभग आधा दर्जन शालाओं में तालाबंदी आंदोलन किया जा चुका है।
वहीं बताते चलें कि जिले में युक्तियुक्तकरण के चलते 415 शालाओं को मर्ज किया जा चुका है जिसके बाद अब संचालित शालाओं की संख्या 1079 रह गई है, जिसकी जिम्मेदारी लगभग 6000 शिक्षकों पर है। वहीं प्रति 30 बच्चों में 1 शिक्षक की मौजूदगी ज़रूरी है, इसी आंकड़े के हिसाब से हर शाला में शिक्षकों की संख्या निर्धारित होती है, इसके अलावा गणित, विज्ञान, अंग्रेजी के शिक्षकों का हर शाला में होना अनिवार्य है, लेकिन ऐसा होता नज़र नहीं आ रहा।
अब अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि 415 शालाओं के बंद होने के बावजूद जिले में शिक्षकों की पूर्ति नहीं हो पा रही है, जो शासन प्रशासन की नाकामी का प्रमाण साबित हो रहा है।