बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले सीट शेयरिंग को लेकर एनडीए और महागठबंधन में दबाव की राजनीति जारी है। एनडीए में शामिल चिराग पासवान भी इसी काम में लगे हुए हैं।
हालांकि एक बात तय है कि एनडीए के अहम सहयोगी लोजपा (रामविलास) के नेता और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान विधानसभा चुनाव में एनडीए की सामूहिक रणनीति के हिसाब से ही चलेंगे।
चूंकि, पिछले विधानसभा चुनाव में लोजपा एनडीए से बाहर थी, इसलिए इस बार उसके लिए नए सिरे से सीटों का आवंटन किया जाएगा।
ऐसे में लोजपा (रामविलास) के बयानों को उसकी ज्यादा से ज्यादा सीटों की संभावित दावेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है।
चिराग पासवान के खुद के चुनाव लड़ने और सीटों पर लोजपा (रामविलास) के लड़ने के बयान पर भाजपा ने साफ किया है कि एनडीए की सभी पार्टी सभी सीटों पर लड़ेगी।
गठबंधन का जो भी उम्मीदवार होगा वह हर दल का होगा, ऐसे में चिराग के बयान में कुछ भी गलत नहीं है। जहां तक चिराग के खुद के चुनाव लड़ने की बात है, तो यह उनकी पार्टी तय करेगी कि कौन चुनाव लड़ेगा कौन नहीं।
गौरतलब है कि गठबंधन में चिराग की मजबूती के पीछे भाजपा का पूरा समर्थन है। चिराग खुद भी कई बार खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हनुमान बता चुके हैं।
भाजपा के हिसाब से चलेंगे चिराग
भाजपा सूत्रों का कहना है, चिराग गठबंधन में भाजपा के हिसाब से ही चलेंगे। उनका मौजूदा दबाब सीटों को लेकर है, क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव में वह साथ में नहीं थे, इसलिए इस बार अपनी पार्टी के लिए ज्यादा सीटें चाहते हैं और लोकसभा चुनावों के फॉर्मूले को अपनाने पर जोर दे रहे हैं।
इसमें भाजपा व जदयू को तो ज्यादा नुकसान नहीं होगा, लेकिन लोजपा (रामविलास) को ज्यादा लाभ होगा। इससे जीतनराम मांझी की हम व उपेंद्र कुशवाह की रालोमो की दिक्कतें बढ़ेंगी। हालांकि, भाजपा का मानना है कि यह ज्यादा बड़ी समस्या नहीं है और जल्द ही इस पर सहमति बना ली जाएगी।
30 सीटों की मांग
सूत्रों के अनुसार लोजपा (रामविलास ) की मांग लगभग 30 सीटों की है, लेकिन उसे 20 से 25 सीटें ही मिलने की संभावना है।
भाजपा व जदयू लगभग सौ-सौ सीटों पर लड़ सकती है और बाकी सीटें अन्य दोनों सहयोगियों को दिए जाने की संभावना है। इस बीच कुछ और स्थानीय दलों के भाजपा के साथ जुड़ने की भी संभावना है।