पाकिस्तान को कहा था ‘कैंसर’, कराची के ‘भाई’ अल्ताफ हुसैन की हालत नाजुक; लंदन के अस्पताल में भर्ती…

लंदन से ही कराची को कंट्रोल करने की क्षमता रखने वाले मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (MQM) के संस्थापक अल्ताफ हुसैन को गंभीर बीमारी के चलते अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

अल्ताफ हुसैन 1992 से ही लंदन में निर्वासित जीवन जी रहे हैं। अल्ताफ ने मोहाजिरों के अधिकारों के लिए मोहाजिर कौमी मूवमेंट नाम की पार्टी बनाई थी।

हालांकि जब उनकी पार्टी का नाम अलगाववादियों के साथ जोड़ा जाने लगा तो उन्होंने ही मोहाजिर की जगह मुत्ताहिदा कर दिया।

ब्रिटेन की सरकार ने उन्हें नागरिकता दे दी है। लंदन में रहकर भी पाकिस्तान की राजनीति में उनका दबदबा बना ही रहता है। वह अकसर वीडियो के जरिए अपने राजनीतिक भाषण पहुंचाते रहते हैं।

MQM नेता मुस्तफा अजीजाबादी ने उनके स्वास्थ्य की जानकारी देते हुए कहा उनके टेस्ट किए जा रहे हैं। उन्होंने लोगों से अल्ताफ हुसैन की अच्छी सेहत की दुआ करने की अपील की है।

पाकिस्तानी अखबार डॉन से बात करते हुए अजीजाबादी ने कहा, तनाव से जूझ रहे अल्ताफ हुसैन के डॉक्टरों ने ब्लड ट्रांसफ्यूजन की सलाह दी थी।

इसके अलावा अन्य बीमारियों का भी इलाज चल रहा है। फिलहाल वह लंदन के अस्पातल में आईसीयू में भर्ती हैं। 2021 में उन्हें कोरोना भी हो गया था।

कौन हैं अल्ताफ हुसैन

साल 2018 से पहले कराची में अल्ताफ हुसैन का सिक्का चलता था। कराची की राजनीति उनके इशारे पर चलती थी। हालांकि बाद के सालों में उनका रुतबा कम होने लगा।

अल्ताफ हुसैन ऐसे राजनेता हैं जिन्होंने पाकिस्तान में रहने वाले करोड़ों मोहाजिरों के अधिकारों की लड़ाई लड़ी। विभाजन के बाद जो मुसलमान भारत से पाकिस्तान गए थे उन्हें मोहाजिर कहा जाता है। ज्यादातर मोहाजिर उर्दू भाषी हैं।

हुसैन का जन्म 17 सितंबर 1953 को कराची में ही हुआ था। शुरुआती शिक्षा उन्होंने अजीजाबाद से ली। इसके बाद कराची यूनिवर्सिटी में फार्मेसी की पढ़ाई करने लगे।

कराची विश्वविद्यालय में ही वह अजीम तारिक के संपर्क में आए। उन्होंने ऑल पाकिस्तान मोहाजिर स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन का गठन किया था।

थोड़े ही समय में APMSO की लोकप्रियता बढ़ी। इसके बाद हुसैन ने मोहाजिर कौमी मूवमेंट का स्थापना की। 1988 के चुनाव में सिंध के शहरी इलाकों में पार्टी ने क्लीन स्वीप कर दिया। वहीं 1990 में हुसैन खुद ही निर्वासित जीवन जीने के लिए लंदन चले गए।

कराची को पाक से अलग करने की मांग

हुसैन पर आरोप लगे कि सत्ता पाने के के लिए वह हिंसा कासहारा लेते हैं। वहीं हुसैन का कहना था कि उनके कार्यकर्ताओँ पर लगातार हमले होते हैं।

2013 हुसैन ने कराची को पाकिस्तान से अलग करने की मांग कर दी थी। वहीं बाद में उनकी पार्टी ने सफाई दी और कहा कि उनकी बातों का गलत मतलब निकाला गया है।

पाकिस्तान को बता दिया था दुनिया का कैंसर

हुसैन ने अगस्त 2016 में अपने एक भाषण में पाकिस्तान को दुनिया का कैंसर बता दिया था। इसके बाद एमक्यूएम कार्यकर्ताओं ने एआरवाई न्यूज के ऑफिस पर हमला कर दिया।

वहीं पाकिस्तानी एजेंसियों ने अजीजाबाद में हुसैन के घर पर और कराची हेडक्वार्टर पर छापा मारा। हुसैन की पार्टी के ही नेताओं ने उनसे दूरी बना ली और पार्टी के संविधान से उनका नाम भी हटा दिया।

वहीं 2019 में ब्रिटिश पुलिस ने भी उनपर हिंसा के लिए उकसाने का आरोप लगाया। उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 2022 में एक अदालत ने उन्हें बाइज्जत बरी कर दिया।

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