दो दिन में दूसरी बार, चीनी लड़ाकू विमान ने US सहयोगी के एयरक्राफ्ट को 100 फीट की दूरी पर 15 मिनट तक रोके रखा…

पड़ोसी देश चीन, अपनी सीमा से सटे चीन सागर में लंबे समय से दादागीरी दिखाता रहा है।

यही वजह है कि पड़ोसी देशों वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान से उसका विवाद चल रहा है।

अब नए घटनाक्रम में चीन ने दो दिन लगातार पूर्वी चीन सागर के ऊपर आसमान में अमेरिका के सहयोगी और अपने निकटस्थ पड़ोसी जापान के टोही विमान को अपने फाइटर-बमवर्षक विमान ‘जेएच-7’ की आड़ में करीब 10-15 मिनट तक रोके रखा।

जापान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि बुधवार और बृहस्पतिवार को लगातार दो दिन चीनी लड़ाकू-बमवर्षक विमान ‘जेएच-7’ ने जापान ‘एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स’ के ‘वाईएस-11ईबी’ ‘इलेक्ट्रॉनिक-इंटेलिजेंस विमान’ के पास से न सिर्फ उड़ान भरी बल्कि 10 से 15 मिनट तक रास्ता रोके रखा।

मंत्रालय ने कहा कि यह घटना पूर्वी चीन सागर के ऊपर हुई। हालांकि यह जापानी हवाई क्षेत्र नहीं था और इससे जापानी पक्ष को कोई नुकसान भी नहीं हुआ।

जिस वक्त चीनी बमवर्षक विमानों ने जापानी टोही विमानों का रास्ता रोका था, उस वक्त दोनों विमानों के बीच क्षैतिज दूरी सिर्फ 196 फीट और दोनों विमानों के बीच ऊंचाई सिर्फ 98 फीट थी।

जापान ने चीन को दी चेतावनी

जापान ने चीन से कहा है कि वह अपने लड़ाकू विमानों को जापानी टोही विमानों के करीब उड़ाना बंद करे। जापान के अनुसार चीन लगातार ऐसा कर रहा है और इससे टकराव हो सकता है।

चीन ने इस पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की है। इससे पहले, चीन ने आरोप लगाया था कि जापानी विमान उसके विमान के करीब से उड़ान भर रहे हैं और चीन की सैन्य गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं तथा उसने जापान से इन गतिविधियों को बंद करने को कहा था।

ऐसी हरकत दोबारा ना हो: जापान

जापान के विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार देर रात जारी एक बयान में कहा कि उप मंत्री ताकेहिरो फुनाकोशी ने जापान में मौजूद चीनी राजदूत वू जियांगहाओ के समक्ष ‘गंभीर चिंता’ व्यक्त की और चीन से ऐसी गतिविधि को रोकने का कहा है। बयान के अनुसार जापान ने कहा कि चीन की इस तरह की कार्रवाई ‘टकराव भड़का सकती है’, साथ ही चीन से यह भी सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि ऐसी कार्रवाइयां दोबारा नहीं हों।

क्या है रक्षात्मक रेखा

बता दें कि अमेरिकी समुद्री नियंत्रण रणनीति के तहत, जापान पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में ताइवान और फिलीपींस के साथ प्रथम द्वीप श्रृंखला का एक सहयोगी और हिस्सा है। इस रक्षात्मक रेखा का उद्देश्य युद्ध की स्थिति में अपने निकटवर्ती जलक्षेत्र में चीन की सैन्य गतिविधियों को कंट्रोल करना है।

इसी वजह से प्रथम द्वीप श्रृंखला के आसपास चीन की बढ़ती सैन्य उपस्थिति का पता लगाने और उसे माकूल जवाब देने के लिए जापान अपने टोही विमानों के जरिए आस-पास के हवाई क्षेत्र और जलक्षेत्र में चीनी वायु और नौसैनिक अभियानों पर कड़ी नजर रख रहा है। चीन को यह नागवार गुजरा। इसलिए उसने हवा में दादागीरी दिखाते हुए जापानी टोही विमानों का रास्ता रोक लिया।

हालांकि, यह साफ नहीं हो सका है कि इन घटनाओं में दोनों तरफ से एक-एक विमान ही शामिल थे या उससे ज्यादा विमान मौके पर तैनात थे।

पिछले महीने जून की शुरुआत में, फर्स्ट आइलैंड चेन के पूर्वी हिस्से में एक विमानवाहक पोत से प्रक्षेपित चीनी लड़ाकू विमानों ने एक जापानी गश्ती विमान को रोक लिया था। तब बीजिंग ने टोक्यो पर खतरनाक कार्रवाई करने का आरोप लगाया जिससे युद्धपोत की प्रशिक्षण गतिविधियों में बाधा उत्पन्न हुई।

चीन ने बना रखा है वायु रक्षा पहचान क्षेत्र

दरअसल, 2013 में ही चीन ने पूर्वी चीन सागर के ऊपर, अपने संप्रभु हवाई क्षेत्र के बाहर, एक वायु रक्षा पहचान क्षेत्र स्थापित किया है।

इसके तहत उस क्षेत्र से गुजरने वाले विदेशी विमानों—जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त नहीं है—को प्रवेश करने पर देश के विमानन प्राधिकरण को सूचित करना आवश्यक है।

ऐसा नहीं होने पर चीनी फाइटर जेट उसे इंटरसेप्ट करते हैं। चीन के अलावा, पूर्वी चीन सागर की सीमा से लगे अन्य देशों ने भी राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में अपने वायु रक्षा पहचान क्षेत्र स्थापित किए हैं।

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