विदेशी दवाओं और तांबे पर ट्रंप की कड़ी नजर, 200% टैरिफ की चेतावनी; भारत पर भी पड़ सकता है असर…

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि वह इस सप्ताह एक नया कार्यकारी आदेश जारी करेंगे, जिसके तहत तांबे के आयात पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा।

यह कदम पहले से मौजूद स्टील और एल्युमिनियम पर लागू टैरिफ के अनुरूप होगा। ट्रंप ने एक कैबिनेट बैठक में कहा, “आज हम तांबे पर काम कर रहे हैं।”

इसके अलावा, उन्होंने विदेशी दवा पर भी भारी भरकम टैरिफ लगाने की धमकी दी है। उन्होंने कहा कि दवा के आयात पर 200 फीसदी तक का टैरिफ लगाया जा सकता है।

ट्रंप ने कहा कि भले ही उनके कार्यकाल के दौरान कई मैन्युफैक्चरिंग नौकरियां खत्म हुई हों लेकिन यह कदम अमेरिकी फैक्ट्रियों को डूबने से बचाने के लिए आवश्यक है।

विदेशी दवा इंडस्ट्री पर ट्रंप की बुरी नजर

अब ट्रंप की नजर दवा उद्योग पर भी है। उन्होंने विदेशी दवाओं पर 200% तक का भारी टैरिफ लगाने की धमकी दी है। इस घोषणा के बाद वैश्विक धातु और दवा बाजारों में हलचल मच गई है।

हालांकि, ट्रंप ने स्पष्ट किया कि दवा उद्योग पर प्रस्तावित टैरिफ तत्काल लागू नहीं होंगे। उन्होंने कहा, “हम कंपनियों को लगभग एक साल, डेढ़ साल का समय देंगे, उसके बाद इन पर बहुत भारी टैरिफ लगेगा।”

उन्होंने यह ‘अस्थायी रोक’ इसलिए देने की बात कही ताकि फार्मा कंपनियां अमेरिका में अपने ऑपरेशन्स स्थापित कर सकें।

तांबे पर टैरिफ का असर

ट्रंप प्रशासन पहले ही अपने लगभग सभी व्यापारिक साझेदारों पर 10 प्रतिशत का टैरिफ लगा चुका है और इस वर्ष स्टील, एल्युमिनियम और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों पर भी शुल्क लगाए गए हैं। अब तांबा और दवाएं इस सूची में शामिल होने जा रही हैं।

ट्रंप ने कहा, “आज हम तांबे पर काम कर रहे हैं। मैं मानता हूं कि तांबे पर टैरिफ 50% होगा।” यह कदम अमेरिकी उद्योगों, विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों, सैन्य उपकरणों, बिजली ग्रिड और उपभोक्ता वस्तुओं के लिए महत्वपूर्ण धातु के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है।

अमेरिका अपनी तांबे की जरूरतों का लगभग आधा हिस्सा आयात करता है, जिसमें चिली, कनाडा और पेरू मुख्य आपूर्तिकर्ता हैं। 2024 में अमेरिका ने 810,000 टन परिष्कृत तांबा आयात किया, जिसमें चिली का हिस्सा सबसे अधिक 65% था।

ट्रंप की घोषणा के बाद न्यूयॉर्क में तांबे के वायदा मूल्य में 17% तक की उछाल देखी गई, जो एक नया रिकॉर्ड है।

हालांकि, चिली, कनाडा और पेरू ने दावा किया है कि उनके आयात अमेरिकी हितों के लिए खतरा नहीं हैं और उन्हें टैरिफ से छूट दी जानी चाहिए, क्योंकि इन देशों के अमेरिका के साथ मुक्त व्यापार समझौते हैं। इन देशों के संबंधित मंत्रालयों ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।

भारत पर क्या असर?

ट्रंप की नई घोषणा ने ऑस्ट्रेलिया और भारत जैसे देशों में चिंता बढ़ा दी है, जो अमेरिका को बड़े पैमाने पर दवाओं का निर्यात करते हैं।

ऑस्ट्रेलिया का दवा उद्योग अमेरिका को प्रति वर्ष 2 बिलियन डॉलर से अधिक का निर्यात करता है। भारत को “विश्व की फार्मेसी” के रूप में जाना जाता है और हमारा देश अमेरिका को जेनेरिक दवाओं और सक्रिय दवा सामग्री (एपीआई) का बड़े पैमाने पर निर्यात करता है।

2024-25 में भारत ने अमेरिका को लगभग 9.8 बिलियन डॉलर मूल्य की दवाओं का निर्यात किया, जो इसके कुल दवा निर्यात का एक बड़ा हिस्सा है।

ट्रंप के भारी टैरिफ से भारतीय दवाएं अमेरिकी बाजार में महंगी हो जाएंगी, जिससे उनकी मांग कम हो सकती है। इससे भारत के दवा निर्यात को भारी नुकसान हो सकता है।

इसके अलावा, भारतीय दवा कंपनियों को अमेरिका में उत्पादन इकाइयां स्थापित करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है, जिसके लिए भारी पूंजी निवेश और समय की आवश्यकता होगी। छोटी और मध्यम आकार की कंपनियों के लिए यह चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

भारत अमेरिका को परिष्कृत तांबे और तांबे से बने उत्पादों का निर्यात करता है, हालांकि इसका हिस्सा चिली या कनाडा जितना बड़ा नहीं है।

2024 में भारत ने अमेरिका को लगभग 500 मिलियन डॉलर मूल्य के तांबे और संबंधित उत्पादों का निर्यात किया। फिर भी तांबे पर टैरिफ से भारतीय निर्यातक कम प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे, क्योंकि उनकी लागत बढ़ जाएगी। इससे निर्यात मात्रा में कमी आ सकती है।

14 देशों को चेतावनी, 70% तक टैरिफ संभव

ट्रंप ने खुलासा किया कि इस हफ्ते 14 विदेशी नेताओं को पत्र भेजे गए हैं, जिनमें नए टैरिफ की चेतावनी दी गई है। कुछ देशों पर आयात शुल्क 70 प्रतिशत तक जा सकता है।

ट्रंप ने कहा, “यह ज्यादा ताकतवर तरीका है। हम आपको एक पत्र भेजते हैं, आप उसे पढ़ते हैं। मुझे लगता है, वह बहुत अच्छे से लिखा गया है।”

नवीकरणीय ऊर्जा पर भी निशाना

ट्रंप ने एक बार फिर पवन ऊर्जा को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा, “हमें ऐसे साधनों की जरूरत है जो हमारे कारखानों को ताकत दे सकें और वह हवा तो नहीं है।”

उन्होंने कहा कि विंड टर्बाइनों से दृश्यता खराब होती है और ये केवल तब बिजली पैदा करते हैं जब हवा चल रही होती है। ट्रंप के अनुसार, जो देश पवन और सौर ऊर्जा से दूरी बनाए हुए हैं, वे “समझदार” हैं और अमेरिका “शानदार” है जो पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों- खासकर कोयले को प्राथमिकता देता है।

डॉलर की वैश्विक स्थिति बचाने के लिए BRICS पर टैरिफ की धमकी

राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिकी डॉलर ने अपनी वैश्विक आरक्षित मुद्रा की स्थिति खो दी, तो “यह एक विश्व युद्ध हारने जैसा होगा।”

उन्होंने कहा कि अमेरिका ऐसा होने नहीं देगा। ट्रंप ने BRICS देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है, जो डॉलर को दरकिनार करने के विकल्प तलाश रहे हैं। ट्रंप ने कहा, “अगर लोग चुनौती देना चाहते हैं, तो उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।”

यूक्रेन युद्ध और फेड चेयर पर भी सख्त रुख

रूस-यूक्रेन युद्ध पर बात करते हुए ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि व्लादिमीर पुतिन “दोनों तरफ बहुत सारे लोगों को मार रहे हैं।”

हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि वह इस मुद्दे पर क्या कदम उठाएंगे, तो उन्होंने कहा, “मैं आपको नहीं बताऊंगा।” उन्होंने माना कि यह युद्ध “उम्मीद से ज्यादा कठिन” साबित हुआ है।

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