चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स समिट में शामिल नहीं हुए। इसके अलावा वह पिछले कुछ समय से कम ऐक्टिव हैं और उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी की कई जिम्मेदारियां दूसरे नेताओं को दी हैं।
इसके बाद से ही चर्चाएं तेज हैं कि शी जिनपिंग क्या रिटायर होने वाले हैं? करीब एक दशक से शी जिनपिंग सत्ता में हैं और कयास हैं कि चीन में सत्ता परिवर्तन हो सकता है।
यह दिलचस्प है क्योंकि 2018 में ही शी जिनपिंग की पहल पर संविधान बदल गया था, जिसमें कहा गया था कि एक नेता दो बार से ज्यादा राष्ट्रपति नहीं बन सकता है। ऐसे में 2027 में नए चुनाव से पहले शी जिनपिंग का रुख उनके रिटायर होने के संकेत दे रहा है।
चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक 24 सदस्यों वाली राजनीतिक समिति की मीटिंग शी जिनपिंग की अध्यक्षता में हुई थी।
30 जून को हुई इस मीटिंग में पार्टी की केंद्रीय समिति की कई टोलियों से जुड़े लोग मौजूद थे। इस दौरान शी जिनपिंग ने इन लोगों को बताया कि वे कैसे समन्वय, निर्णय और जरूरी टास्क पूरे करने पर ध्यान दें।
शिन्हुआ न्यूज के अनुसार इन मीटिंग्स से यह संकेत मिलता है कि शी जिनपिंग बैकसीट पर जाना चाहते हैं और रिटायरमेंट की प्लानिंग कर रहे हैं।
क्यों शी जिनपिंग ने बुलाई मीटिंग, संविधान में खुद कराया था बदलाव
ऐसा कुछ होता है तो यह अहम होगा क्योंकि शी जिनपिंग को लेकर एक राय बन रही थी कि वह शायद हमेशा के चीन के नेता बने रहना चाहते हैं और इसी मकसद से संविधान में बदलाव कराया गया है।
राष्ट्रीय कार्यों में बेहतर नेतृत्व और समन्वय की उम्मीद की जा रही है। लेकिन विश्लेषकों के बीच यह बहस छिड़ गई है कि कहीं ये बदलाव शी की नेतृत्व से धीरे-धीरे पीछे हटने की तैयारी तो नहीं है।
दक्षिण चीन मॉर्निंग पोस्ट में नाम न छापने की शर्त पर एक विश्लेषक ने कहा, ‘ये नियम इसलिए बनाए जा रहे होंगे क्योंकि यह सत्ता हस्तांतरण का समय है।’
शी जिनपिंग की प्लानिंग पर क्या बोले एक्सपर्ट
हालांकि एक अन्य एक्सपर्ट ने ऐसा मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि शी जिनपिंग अब चीन की सरकार के संचालन के रोजमर्रा के काम से हटना चाह रहे हैं।
वह पॉलिसी बनाने के लिए टॉप लेवल पर काम कर रहे हैं। ऐसे में वह नहीं चाहते कि कोई काम रुके और ऐसी स्थिति में अपने मातहत अधिकारियों और नेताओं को जिम्मेदारी दे रहे हैं।
इस बीच ब्रिक्स में उनके ना जाने से भी कयास लगे हैं। अपने राष्ट्रपति रहने के दौरान पहली बार ऐसा हुआ है, जब शी जिनपिंग ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने नहीं गए।