सैयद जावेद हुसैन (सह संपादक – छत्तीसगढ़):
धमतरी- ज़िले की बहु प्रतीक्षित सड़क इन दिनों दलदल में तब्दील हो चुकी है। हालत ऐसे है कि एक हल्की सी बारिश भी इस मार्ग को कीचड़ नुमा दलदल में तब्दील कर रही है।
जिससे इस मार्ग में बसे लगभग 2 दर्जर से ज्यादा गांवों के ग्रामीणों के आवागमन में भारी दिक्कतें आ रही हैं। जहां से गुजरना एक बड़ी चुनौती बन चुका है।
लेकिन मार्ग से गुजरने में सबसे ज़्यादा तकलीफ़ स्कूली बच्चों और कॉलेज की छात्राओं को हो रही है, जिन्हें ऐसी चुनौती पूर्ण डगर में चलने का ज़रा भी तजुर्बा नहीं है, एक ज़रा सी चूक उन्हें दलदल भरी सड़क में कीचड़ से लथपथ कर रही है जिससे उनकी स्कूल ड्रेस के साथ साथ कॉपी किताब तो खराब हो ही रही है, वे चोटिल हो रहे सो अलग।
मालूम हो कि इस सड़क के निर्माण को लेकर सत्तापक्ष समेत विपक्ष से लेकर सैकड़ों ग्रामीणों ने पहले तो कई आंदोलन किए, सड़क संघर्ष समिति भी बनाई गई, ये सब के सब इन दिनों इस बदहाल निर्माणाधीन सड़क को लेकर ख़ामोशी अख्तियार किए हुए हैं।
जिले के एक एक्सीडेंटल जनप्रतिनिधि भी इस सड़क को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं। जैसे उन्हें अब उस जनता से कोई सरोकार ही नहीं रह गया, जिनकी दहलीज पर चंद महीने पहले वो अपने पक्ष में समर्थन मांगने कई बार पहुंचे थे। ऐसे में जनता भी उनके इस व्यवहार को लेकर उनके खफ़ा नज़र आ रही है।
रेत खदान भी है जिम्मेदार…
ज्ञात हो कि 10 जून से सभी तरह की खदानों से खनन कार्य बंद कर दिया जाता है, ये नियम देश भर की तमाम तरह की खदानों के लिए लागू रहता है।
लेकिन ये नियम शायद जिले की महानदी पर लागू नहीं होता! यहां सालभर जैसे गुड़ की डली में चींटियां झूमे रहती हैं, वही नज़ारा अब भी महानदी का है।
बिना किसी रोकटोक के बेधड़क रेत का अवैध खनन जारी है, जिसकी सुध लेने वाले खनिज विभाग की नज़रों में ये रेत घाट जैसे आते ही नहीं। ये नज़ारा कोलियारी से लेकर जिले के अंतिम छोर की नदी तक जारी है। जिस पर कोई अंकुश नहीं है।
कोलियारी खरेंगा सड़क जो इन दिनों निर्माणाधीन है वहीं से रेत से भरे सैकड़ों ट्रैक्टर निकलते हैं, जो सड़क को दलदल में तब्दील करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे, रोजाना सैकड़ों ट्रैक्टर गुजरने की वजह से सड़क और भी बदतर हो जाती है।
जहां बारिश के बाद कीचड़, और दलदल तो होती है, वहीं कीचड़ सूखने के बाद बेतहाशा धूल का गुबार राहगीरों के सब्र का इम्तेहान ले रहा है।
ऐसे में जनता की सेहत से लेकर उनकी सुरक्षा को लेकर कोई भी प्रयास ज़िला प्रशासन द्वारा इन दिनों नहीं की जा रहा है। एक ग्रामीण ने बताया कि इस मार्ग से केवल रेत परिवहन ही बंद हो जाए तो सड़क की स्थिति इतनी बुरी न हो, लेकिन रेत माफियाओं की प्रशासन से मिलीभगत के चलते जनता के हितों को दरकिनार कर रेत माफियाओं को लाभ दिलाने ये सब जारी है।
यहां बताते चले कि इस दुर्दशा को लेकर स्थानीय विधायक प्रतिनिधि समेत एसडीएम को भी कॉल कर स्थिति से अवगत कराया गया लेकिन कोई प्रयास अब तक नहीं किया गया।
जो दर्शाता है कि जनप्रतिनिधि समेत प्रशासन को भी इस क्षेत्र की जनता की कोई खास फ़िक्र नहीं रही, उन्हें शायद अपने अघोषित राजस्व से ही मतलब है!