हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: सिर्फ ‘आई लव यू’ कहना नहीं है यौन उत्पीड़न, युवक को क्यों मिली राहत?…

किसी युवती या महिला से सिर्फ ‘आई लव यू’ कहना यौन उत्पीड़न नहीं है, जब तक कि इन शब्दों के साथ ऐसा आचरण न हो जो स्पष्ट रूप से उस पुरुष के यौन इरादे को दर्शाता हो।

बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने हाल ही में यह फैसला सुनाया है। पीठ ने 2015 में एक किशोरी से छेड़छाड़ के कथित आरोपी 35 वर्षीय व्यक्ति को बरी करते हुए दो टूक कहा कि ‘आई लव यू’ कहना केवल भावनाओं की अभिव्यक्ति है और यह अपने आप में ‘यौन इरादे’ का प्रकटीकरण नहीं है।

रवींद्र पुत्र लक्ष्मण नारेते बनाम महाराष्ट्र राज्य के मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस उर्मिला जोशी फाल्के ने कहा कि आई लव यू जैसे वाक्यांश यौन इरादों को प्रकट नहीं करते हैं।

पीठ ने एक नाबालिग लड़की का पीछा करने और उसका यौन उत्पीड़न करने के आरोप में यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम (POCSO अधिनियम) और भारतीय दंड संहिता (IPC) के प्रावधानों के तहत दर्ज एक व्यक्ति की सजा को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की है।

कृत्य से भी तो परिलक्षित होने चाहिए

30 जून को दिए गए फैसले में पीठ ने कहा, “मैं तुमसे प्यार करता हूँ (I Love You)” जैसे शब्द अपने आप में “यौन इरादे” प्रकट नहीं करते, जैसा कि विधायिका द्वारा भी माना जाता है। कुछ और भी होना चाहिए जो यह साबित कर सके कि उस शख्स का वास्तविक इरादा यौन कृत्य से जुड़ा था।” कोर्ट ने कहा कि अगर बोले गए शब्दों को यौन इरादे के रूप में लिया जाता है तो यह उसके कुछ कृत्य से भी परिलक्षित होने चाहिए।”

यौन उत्पीड़न में क्या -क्या शामिल

जस्टिस उर्मिला जोशी-फाल्के की पीठ ने सोमवार को पारित आदेश में कहा कि किसी भी यौन कृत्य में अनुचित स्पर्श, जबरन कपड़े उतारना, अभद्र इशारे करना या महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से की गई कोई टिप्पणी शामिल होनी चाहिए।

शिकायत के अनुसार, व्यक्ति ने नागपुर में 17 वर्षीय पीड़िता को परेशान किया, उसका हाथ पकड़ा और कहा ‘मैं तुमसे प्यार करता हूं’।

कब का और क्या है मामला?

यह मामला 23 अक्टूबर, 2015 का है, जब नागपुर के खापा गांव में 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली 17 वर्षीय लड़की अपने चचेरे भाई के साथ स्कूल से घर लौट रही थी, तभी आरोपी ने कथित तौर पर एक खेत के पास अपनी मोटरसाइकिल से पीछा कर उन्हें रोक लिया।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, उसने लड़की का हाथ पकड़ा औऱ जोर देकर कहा कि वह उसे अपना नाम बताए और कहा, “मैं तुमसे प्यार करता हूँ।” बाद में लड़की ने अपने पिता को इसके बारे में बताया, जिन्होंने उसी दिन पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

हाई कोर्ट ने पलटा जिला कोर्ट का फैसला

इस मामले में नागपुर की एक सत्र अदालत ने उसे 2017 में भारतीय दंड संहिता और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराया था और उसे तीन साल कारावास की कठोर कारावास की सजा सुनाई और 5000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।

उस शख्स ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी और कहा कि उसके आई लव यू कहने के पीछे कोई यौन इरादा नहीं था और न ही उसने उसका बार-बार पीछा किया था। हाईकोर्ट ने शख्स के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उसकी दोषसिद्धी रद्द कर दिया।

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