खाने को दाना नहीं, पीने को पानी नहीं; फिर भी PAK ने 20% बढ़ाया रक्षा बजट, इसके बावजूद भारत से अब भी काफी पीछे…

पड़ोसी देश पाकिस्तान की माली हालत खस्ता है, ये बात पूरी दुनिया में किसी से छुपी नहीं है।

एक दिन पहले ही पाकिस्तान के आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट में कहा गया है कि देश कर्ज के पहाड़ के तले दबा हुआ है। पाकिस्तान का कर्ज 76007 अरब पाकिस्तानी रुपये हो चुका है, जो अपने इतिहास में सर्वोच्च स्तर है।

अब पाकिस्तान ने अपना रक्षा बजट बढ़ाकर 20 फीसदी कर दिया है। यानी पाकिस्तान जन कल्याण को छोड़कर गोले-बारूद और हथियारों की खरीद पर अपना पैसा खर्च करेगा।

भले ही वहां का आम जनमानस रोटी और पानी के लिए तरसता रहे। यह फैसला पाक सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का सरकार पर बढ़ता दबाव भी दिखाता है।

पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने रक्षा बजट में बढ़ोत्तरी का यह फैसला पिछले महीने भारत के साथ हुए चार दिनों के घातक सैन्य संघर्ष के बाद लिया है।

मंगलवार (10 जून) को पेश किए गए बजट में शहबाज शरीफ सरकार के वित्त मंत्री ने वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में कुल खर्च में 7% की कटौती करते हुए उसे 17.57 ट्रिलियन रुपये यानी 17,57,000 करोड़ रुपये (62 अरब डॉलर) कर दिया है।

पाकिस्तान का रक्षा बजट 9 अरब डॉलर

बता दें कि इसी महीने समाप्त हो रहे वित्तीय वर्ष में पाकिस्तान का कुल रक्षा बजट 2.12 ट्रिलियन रुपये यानी 2,12,000 करोड़ रुपये था, जिसमें अब 20 फीसदी का इजाफा किया गया है।

पाकिस्तानी वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने संसद में अपने बजट भाषण के दौरान कहा कि सरकार पिछले बजट में आवंटित 2.12 ट्रिलियन रुपये की तुलना में रक्षा बजट के लिए 2.55 ट्रिलियन रुपये यानी 2,55,000 करोड़ रुपये (9 अरब डॉलर) आवंटित कर रही है।

बावजूद इसके पाकिस्तान की रक्षा खर्च वृद्धि इस क्षेत्र में बहुत पीछे है। एशियाई विकास बैंक के अनुसार, 2024 में दक्षिण एशियाई देशों में औसतन रक्षा में 5.8% की वृद्धि हुई और 2025 में 6.0% की वृद्धि होने की उम्मीद है।

भारत बनाम पाकिस्तान का रक्षा बजट

अब बात भारत से तुलना की। रक्षा बजट के मामले में भारत पाकिस्तान से बहुत आगे है। भारत का रक्षा बजट पाकिस्तान के रक्षा बजट 9 अरब डॉलर के मुकाबले करीब नौ गुना ज्यादा है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत ने अपने रक्षा बजट में 78.7 अरब डॉलर आवंटित किए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.5% ज्यादा है, जिसमें पेंशन और उपकरणों के लिए निर्धारित 21 अरब डॉलर शामिल है।

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