अमरिका ने अब सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाने की कोशिश करने वाले विदेशी अधिकारियों पर सीधा वार करने का फैसला किया है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बुधवार को ऐलान किया कि ऐसे विदेशी नागरिकों पर वीजा प्रतिबंध लगाया जाएगा जो अमेरिकी नागरिकों या कंपनियों के ऑनलाइन अभिव्यक्ति के अधिकारों पर सेंसरशिप थोपने की कोशिश कर रहे हैं।
रुबियो ने कहा कि यह नीति उन लोगों पर लागू होगी जो अमेरिका में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकारों का उल्लंघन करते हैं, या सोशल मीडिया पर अमेरिकी नागरिकों की पोस्ट को हटवाने या दबाव डालने की कोशिश करते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे अधिकारियों को अमेरिका आने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
किन देशों की तरफ अमेरिका का इशारा
हालांकि रुबियो ने किसी देश या व्यक्ति का नाम नहीं लिया, लेकिन माना जा रहा है कि यूरोप और लैटिन अमेरिका के कुछ देश इस दायरे में आ सकते हैं।
यूरोपीय संघ का डिजिटल सर्विस एक्ट पहले से ही अमेरिकी टेक कंपनियों की आलोचना का केंद्र रहा है, जिसे अमेरिका में सेंसरशिप की एक मिसाल बताया जा रहा है।
ट्रंप प्रशासन और अमेरिकी टेक कंपनियां इसे अमेरिका के अधिकार क्षेत्र में दखल मान रही हैं।
रुबियो ने कहा, “चाहे वो लैटिन अमेरिका हो या यूरोप, अब वो दिन गए जब ऐसे लोगों के साथ नरमी बरती जाती थी जो अमेरिकियों के अधिकारों को दबाने की कोशिश करते हैं।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह मसला अब अमेरिकी कूटनीति का हिस्सा होगा और यूरोपीय नेताओं के साथ बातचीत में उठाया जाएगा।
पहले भी सख्त हुआ था अमेरिका
इससे पहले अमेरिका ने अपने ही विदेश विभाग के एक ऑफिस को बंद कर दिया था, जो विदेशी प्रोपेगैंडा और डिसइनफॉर्मेशन के खिलाफ काम कर रहा था।
रुबियो ने तब भी उसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला और टैक्सपेयर्स का दुरुपयोग बताया था।