अकसर लोग मुकदमों के चक्कर में अदालतों की सीढ़ियां चढ़ते-उतरते थक जाते हैं, लेकिन तेलंगाना के निजामाबाद में जज ने सड़क पर ही बुजुर्ग दंपति को न्याय दिया।
इसकी वजह थी कि बुजुर्ग दंपति अस्वस्थ थे और उनके लिए अदालत परिसर में जाना मुश्किल था।
इसकी जानकारी जैसे ही मजिस्ट्रेट को मिली तो वह सड़क पर ही आ गए और वहीं फैसला दिया।
बुजुर्ग दंपति रिक्शे से कोर्ट परिसर तक पहुंचा था, लेकिन उनके लिए अंदर जाना मुश्किल हो रहा था। ऐसे में जज ने ही बाहर आना उचित समझा।
इस मामले को लेकर जज की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है तो वहीं अदालतों के कमजोर इन्फ्रास्ट्रक्चर पर भी सवाल उठ रहे हैं।
अडिशनल जूनियर सिविल जज ई. एस. शिवा की सोशल मीडिया पर खूब तारीफ की जा रही है। केस की सड़क पर ही हुई सुनवाई का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
इसमें दिखता है कि जज अदालत परिसर के बाहर सड़क पर ही आदेश पर साइन करते हैं। वहीं बुजुर्ग दंपति भी हैं।
फैसले के लिए आए बुजुर्ग शख्स किसी तरह रिक्शे के भीतर ही बैठे रहते हैं, जबकि महिला हाथ जोड़े बाहर खड़ी नजर आती है।
यह मामला घरेलू वैवाहिक संबंधों में क्रूरता का था, जिसमें बुजुर्ग दंपति के खिलाफ 2021 में केस दर्ज किया गया था। इस केस में सेक्शन 498ए के तहत केस दर्ज हुआ था। फिर चार्जशीट भी दाखिल हुई थी।
इस मामले में बुजुर्ग दंपति के. सायम्मा और के.एन. गंगाराम के खिलाफ केस फाइल हुआ था और कुल तारीखों के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।
इसी पर अदालत को आदेश देना था। बुजुर्ग दंपति का एक महीने ही ऐक्सिडेंट हो गया था और वे चलने में असमर्थ थे।
जज को जब ऐसी स्थिति की जानकारी मिली तो उन्होंने बिना इंतजार किए ही सड़क पर पहुंचने का फैसला लिया।
यहीं पर उन्होंने केस में आदेश दिया और उस पर साइन किए। बुजुर्ग दंपति के खिलाफ उनकी बहू ने ही घरेलू हिंसा के केस दायर कराया था, जिसे गलत पाया गया।
इस तरह बुजुर्ग दंपति को राहत भरा फैसला जज ने सुनाया। अदालत ने बुजुर्ग दंपति को क्रूरता के आरोपों से बरी करते हुए कहा कि जांच के बाद दोनों को दोषी नहीं पाया गया।